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ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ देश का पहला AI क्लिनिक, फेफड़ों और दिल की बीमारियों का होगा रियल-टाइम निदान

ग्रेटर नोएडा के GIMS में देश का पहला सरकारी AI क्लिनिक शुरू हुआ है, जहां AI और जेनेटिक स्क्रीनिंग की मदद से कैंसर, दिल, किडनी और फेफड़ों जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती स्तर पर पता लगाया जाएगा

ग्रेटर नोएडा, 6 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (GIMS) में देश का पहला सरकारी AI क्लिनिक शुरू हो गया है। इस क्लिनिक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जेनेटिक स्क्रीनिंग के जरिए कैंसर, दिल, किडनी और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती पता लगाया जाएगा और उनका इलाज किया जाएगा। यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में AI को शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

AI क्लिनिक का उद्देश्य एडवांस्ड एल्गोरिदम और ऑटोमेशन की मदद से मरीजों की शुरुआती जांच, इलाज और देखभाल को बेहतर बनाना है। छोटे या बड़े अस्पताल का हिस्सा होने के साथ-साथ यह क्लिनिक ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में मदद करेगा। AI सिस्टम मरीजों के लक्षणों का रियल-टाइम विश्लेषण करके गंभीर मामलों की पहचान करने में सक्षम है।

GIMS के डायरेक्टर ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता के मुताबिक AI क्लिनिक ब्लड टेस्ट, इमेजिंग स्कैन और अन्य क्लिनिकल डेटा का विश्लेषण करेगा। AI टूल्स एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई रिपोर्ट और लैब जांचों को भी देखेंगे। इसका फायदा यह होगा कि शुरुआती चरण में ही गंभीर बीमारियों का पता चल सके और इलाज और देखभाल में सुधार हो। इस पहल से हेल्थकेयर स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर भी खुलेंगे।

AI एल्गोरिदम एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई का विश्लेषण करके फ्रैक्चर, फेफड़ों में गांठ या ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान करता है। यह आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत जानकारी प्रदान करता है और डॉक्टरों को गंभीर मामलों की प्राथमिकता देने में मदद करता है। इससे इलाज के नतीजे बेहतर होते हैं और रेडियोलॉजिस्ट की कार्यक्षमता भी लगभग 40% तक बढ़ जाती है।

AI टिश्यू के विश्लेषण को ऑटोमेट करता है और पैटर्न पहचानता है, जो इंसानी आंख से छूट सकते हैं। डिजिटल पैथोलॉजी के साथ यह जटिल मामलों को जल्दी प्रोसेस कर सकता है और गलतियों की संभावना कम करता है। खासतौर पर शुरुआती कैंसर की पहचान में AI बेहद सहायक है, जिससे स्तन या फेफड़ों में गांठ जैसी गंभीर स्थितियों का जल्दी पता चल सके। क्लिनिक में AI संचालित वियरेबल डिवाइस और ऐप्स दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल को लगातार ट्रैक करेंगे। किसी अनियमितता पर रियल-टाइम अलर्ट भेजे जाएंगे। इससे अस्पताल में दोबारा भर्ती होने की जरूरत कम होगी और मरीजों की देखभाल बेहतर होगी।

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