लखनऊ, 7 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए चल-अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य कर दिया है। यह जानकारी मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। प्रदेश में आठ लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी और अधिकारी इस आदेश के दायरे में आएंगे। प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने स्पष्ट किया है कि 31 दिसंबर 2025 तक अर्जित सभी प्रकार की संपत्तियों का पूरा ब्योरा 31 जनवरी 2026 तक पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
आदेश के अनुसार तय समय सीमा तक संपत्ति विवरण न देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सबसे अहम बात यह है कि जिन कर्मचारियों ने समय पर जानकारी नहीं दी उन्हें फरवरी माह में जनवरी का वेतन नहीं मिलेगा। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कुछ दिन पहले भी मुख्य सचिव ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए थे। उन्होंने कहा था कि सभी अधिकारी-कर्मचारी 31 दिसंबर 2024 तक अर्जित अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करें। एक जनवरी से पोर्टल पर यह सुविधा सक्रिय कर दी गई है, जिससे कर्मचारी आसानी से अपना विवरण ऑनलाइन भर सकें।
मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें। तय सीमा में संपत्ति का विवरण न देने को प्रतिकूल माना जाएगा। इतना ही नहीं एक फरवरी 2025 के बाद होने वाली विभागीय प्रमोशन समितियों (डीपीसी) की बैठकों में ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन पर भी विचार नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी।






