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KGMU बना अखाड़ा, कुलपति ने कहा… डॉ. रमीज संस्थान का हिस्सा नहीं रहेगा, अपर्णा का पलटवार

यौन शोषण व धर्मांतरण के मामले में शुक्रवार को मीडिया से मुखातिब हुईं कुलपति, इसके बाद महिला आयोग की उपाध्यक्ष पहुंचीं, कुलपति ने न मिलने पर समर्थकों ने किया हंगामा, अपर्णा यादव ने कुलपति पर दागे सवाल

लखनऊ, 9 जनवरी 2026:

KGMU में यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन नाइक उर्फ रमीज मलिक को लेकर शुक्रवार को सियासी और प्रशासनिक घमासान देखने को मिला। पहले कुलपति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कार्रवाई की बात कही, उसके बाद महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के पहुंचने पर हंगामा हुआ तो मामला और गरमा गया। इसके बाद कुलपति ने फिर से उनके आरोप निराधार बताते हुए हंगामे पर रोष जाहिर किया। thehohalla news

कुलपति सोनिया नित्यानंद ने ब्राउन हॉल में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि रमीज मलिक अब किसी भी हाल में KGMU का हिस्सा नहीं रहेगा। विशाखा कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर उसे निष्कासित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए DGME को पत्र भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को ही आरोपी को निलंबित कर दिया गया था और तभी से उसका कैंपस में आना-जाना बंद है।

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विशाखा कमेटी की अध्यक्ष और एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. मोनिका कोहली ने बताया कि जांच के दौरान रमीज सिर्फ एक बार कमेटी के सामने पेश हुआ था। उसने दावा किया था कि संबंध आपसी सहमति से बने थे और खुद को अविवाहित बताया था। लेकिन जांच में उसे दोषी पाया गया। इसके बाद पूरी रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी गई। अब आगे की कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन करेगा।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में धर्मांतरण और कट्टरपंथी गतिविधियों की जांच के लिए बनी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. के.के. सिंह और चीफ प्रॉक्टर डॉ. आर.ए.एस. कुशवाहा भी मौजूद रहे। KGMU News UP

इसी बीच महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव KGMU पहुंचीं। उन्होंने कुलपति से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन उनका चैंबर बंद मिला। काफी देर इंतजार के बाद भी जब मुलाकात नहीं हुई तो उनके साथ आए समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया। गेट पीटा गया, नारेबाजी हुई। बाद में गेट खुलवाकर अंदर प्रवेश किया गया।

इसके बाद अपर्णा यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कुलपति उनसे मिले बिना ही निकल गईं। उन्होंने कहा कि अगर मुलाकात हो जाती तो शायद उन्हें प्रेस के सामने आकर सवाल न उठाने पड़ते। उनका इस तरह बिना मिले चले जाना पूरे मामले में KGMU की भूमिका को संदिग्ध बनाता है।अपर्णा यादव ने आरोप लगाया कि जब पीड़िता महिला आयोग में शिकायत लेकर गई थी, तो KGMU में उसे धमकाया गया। उससे पूछा गया कि वह आयोग के पास क्यों गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महिला आयोग कोई संवैधानिक संस्था नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि विशाखा कमेटी में शामिल दो सदस्यों पर पहले से गंभीर आरोप हैं, ऐसे में उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उनका कहना था कि कुछ डॉक्टर आरोपी से उसके फरार होने के बाद भी संपर्क में थे। जब एक प्रोफेसर ने कार्रवाई के लिए पत्र लिखा, तो उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। अपर्णा यादव ने साफ कहा कि वह पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और राज्यपाल से करेंगी।

इधर केजीएमयू प्रशासन ने फिर से प्रेस वार्ता की महिला आयोग के उपाध्यक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए बिना अनुमति प्रेस कांफ्रेंस करने की बात कही है। इसमें कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि ऐसे माहौल में काम करना संभव नहीं है। KGMU परिवार पीस मार्च निकालेगा और जरूरत पड़ी तो बायकॉट भी करेगा।

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