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लखनऊ की तहजीब को सहेजने की पहल : मुजफ्फर अली ने ‘अंजुमन’ की दुर्लभ 35 मिमी प्रिंट NFDC-NFAI को सौंपी

लखनऊ की चिकनकारी की कहानी कहने वाली और स्त्री संघर्ष की सिनेमाई गाथा अब राष्ट्रीय विरासत में सुरक्षित, कलात्मक सिनेमा की धरोहर को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

लखनऊ, 10 जनवरी 2026:

प्रसिद्ध फिल्मकार और सांस्कृतिक चिन्तक मुजफ्फर अली ने भारतीय सिनेमा और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपनी बहुचर्चित और पुरस्कार विजेता हिंदी फिल्म अंजुमन (1986) की दुर्लभ 35 मिमी रिलीज प्रिंट नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC)-नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया (NFAI) को दान की है। यह प्रिंट नई दिल्ली में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में NFDC के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम को सौंपी गई।

अंजुमन का उत्तर प्रदेश विशेष रूप से लखनऊ से गहरा और आत्मीय रिश्ता है। फिल्म की अधिकांश शूटिंग पुराने लखनऊ की गलियों और मोहल्लों में हुई थी। यहां की तहजीब, नफासत और रचनात्मक जीवनशैली को मुजफ्फर अली ने बेहद संवेदनशील और सौंदर्यपूर्ण ढंग से परदे पर उतारा। यह फिल्म लखनऊ की विश्वविख्यात चिकनकारी परंपरा से जुड़ी महिलाओं के जीवन, उनकी मेहनत, हुनर और संघर्षों की मार्मिक कथा कहती है। कला में निपुण होने के बावजूद सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझती इन महिलाओं की कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

वर्ष 1986 में अंजुमन को इंडियन पैनोरमा की आधिकारिक चयनित फिल्मों में शामिल किया गया था। इसके अलावा फिल्म का प्रदर्शन वैंकूवर फिल्म फेस्टिवल और तेहरान फिल्म फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी हुआ। वहां इसे कलात्मक दृष्टि से सराहना मिली। इसके बावजूद फिल्म को व्यावसायिक सिनेमाघरों में व्यापक रूप से प्रदर्शित होने का अवसर नहीं मिल सका।

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इस अवसर पर मुजफ्फर अली ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन के अंतर्गत NFDC-NFAI द्वारा किया जा रहा संरक्षण कार्य भारतीय सिनेमा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सेल्युलॉइड एक नाजुक माध्यम है। ये समय के साथ नष्ट होता जाता है और रंगों व छवियों का क्षय किसी भी फिल्मकार के लिए पीड़ादायक होता है। उनके अनुसार फिल्म संरक्षण कोई व्यवसायिक गतिविधि नहीं बल्कि सांस्कृतिक सेतु का निर्माण है। इसे केवल राष्ट्र की दूरदर्शी सोच से ही संभव बनाया जा सकता है।

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NFDC के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम ने इस अवसर पर कहा कि देश की सिनेमाई धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना समय की मांग है। भारत सरकार के राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन के माध्यम से NFDC-NFAI इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने अंजुमन की दुर्लभ प्रति दान करने के लिए मुजफ्फर अली का आभार व्यक्त करते हुए फिल्म उद्योग से जुड़े अन्य रचनाकारों से भी संरक्षण अभियान में सहभागी बनने की अपील की।

उल्लेखनीय है कि अंजुमन भारतीय सिनेमा की एक महत्वपूर्ण कलात्मक उपलब्धि मानी जाती है। फिल्म में शबाना आजमी ने न केवल सशक्त अभिनय किया बल्कि संगीतकार खय्याम के निर्देशन में अपने स्वयं के प्लेबैक गीत भी गाए। इन गीतों के बोल शायर शाहरीयार और दिवंगत फैज अहमद फैज ने लिखे थे। अंजुमन आज भी लखनऊ और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, सामाजिक और कलात्मक आत्मा का एक अमूल्य सिनेमाई दस्तावेज बनी हुई है।

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