लखनऊ, 12 जनवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में पिछले दिनों हुए हंगामे और तोड़फोड़ के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज न होने से चिकित्सकों, शिक्षकों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। हालात को देखते हुए आज केजीएमयू के पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई गई है। इसमें बड़े आंदोलन का फैसला लिया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो चिकित्सा सेवाओं के बहिष्कार की स्थिति बन सकती है। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मालूम हो कि राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के गत शुक्रवार को केजीएमयू पहुंचने के बाद उनके समर्थकों और कुछ हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने विश्वविद्यालय परिसर में जमकर हंगामा किया था। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने कुलपति कार्यालय को करीब तीन घंटे तक अपने कब्जे में रखा। इससे प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। इस दौरान तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं और कुलपति का सीयूजी मोबाइल फोन गुम हो गया।

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि घटना के तुरंत बाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरएएस कुशवाहा ने केस दर्ज कराने के लिए स्थानीय चौक कोतवाली में तहरीर दी थी लेकिन तीन दिन बीत जाने के बावजूद अब तक मामला दर्ज नहीं हो सका है। इसी बात को लेकर विश्वविद्यालय के डॉक्टरों और कर्मचारियों में रोष लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि इस गंभीर घटना में भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह संस्थान की गरिमा और सुरक्षा पर बड़ा सवाल है।
संभावित आंदोलन और चिकित्सा सेवाओं के बहिष्कार को देखते हुए केजीएमयू परिसर में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए हैं।
केजीएमयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. केके सिंह ने कहा कि कुलपति कार्यालय में हुए हंगामे, प्रदर्शन और तोड़फोड़ की घटना बेहद गंभीर है। अब तक एफआईआर दर्ज न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक आज सभी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। इसमें आगे की रणनीति को लेकर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल केजीएमयू परिसर में तनावपूर्ण माहौल है। सभी की नजर आज होने वाली बैठक पर टिकी हुई है।






