लखनऊ, 13 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश अब रिन्यूएबल एनर्जी के मामले में देश के आगे बढ़ते राज्यों में शामिल हो चुका है। सीएम के विजन के तहत गोबर से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार कर तेल और एलपीजी पर निर्भरता कम करने की ठोस योजना पर काम चल रहा है। इस पहल से सबसे ज्यादा फायदा गोपालकों को होगा, क्योंकि गाय का गोबर अब आमदनी का बड़ा जरिया बनने जा रहा है।
एक वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक प्रदेश में अगर एक लाख गायों के गोबर से मीथेन गैस का सही इस्तेमाल किया जाए, तो पेट्रोलियम उत्पादों पर करीब 500 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।
26 सीबीजी प्लांट शुरू, 21 निर्माणाधीन
2022 से अब तक यूपी नेडा के तहत प्रदेश में 26 से ज्यादा सीबीजी प्लांट लगाए जा चुके हैं। लखनऊ, गोरखपुर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, बाराबंकी, बदायूं, बरेली और मिर्जापुर जैसे जिलों में इनसे उत्पादन शुरू हो चुका है। इसके अलावा 21 से ज्यादा नए प्लांट अलग-अलग जिलों में बन रहे हैं।
सीबीजी बनेगा वैकल्पिक ईंधन
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के मुताबिक सीबीजी को वैकल्पिक ईंधन के तौर पर मजबूत करने के लिए चरणबद्ध योजना लागू की जा रही है। तकनीकी आकलन में सामने आया है कि एक देशी गाय से रोज करीब 10 किलो गोबर मिलता है, जिससे मीथेन युक्त बायोगैस बनाई जा सकती है। ओएसडी अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि इस गैस को साफ कर सीबीजी में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल रसोई गैस और गाड़ियों के ईंधन के रूप में किया जा सकता है।
गांव बनेंगे आत्मनिर्भर, बाराबंकी व मथुरा बने नजीर
एक लाख गायों के गोबर से मीथेन निकालकर करीब 500 करोड़ रुपये की बचत संभव है। इससे विदेशों से आने वाले कच्चे तेल और एलपीजी पर खर्च भी घटेगा। बाराबंकी का निजी साझेदारी वाला सीबीजी प्लांट और मथुरा की श्री माताजी गौशाला इस मॉडल की कामयाबी के उदाहरण हैं। गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैव-उर्वरक और जैव-उर्वरक से खेती की पैदावार बढ़ाने का यह पूरा चक्र गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि प्रदेश को ऊर्जा सुरक्षा भी मिलेगी।






