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10 प्रतिशत जमीन… 21 प्रतिशत अनाज, योगी मॉडल ने बदली यूपी की खेती की कहानी

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कृषि सुधारों से किसान अब सिर्फ जीविका नहीं, बल्कि सम्मान और आर्थिक मजबूती महसूस कर रहे हैं, जिससे राज्य की खेती राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में 21% योगदान देने लगी है

लखनऊ, 15 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश के पास देश की कुल कृषि भूमि का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन इसके बावजूद अब राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह बदलाव योगी सरकार की कृषि केंद्रित नीतियों का परिणाम माना जा रहा है। वर्ष 2017 से पहले जहां कृषि क्षेत्र की विकास दर सिंगल डिजिट तक सीमित थी, वहीं बीते तीन वर्षों में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की वृद्धि दर 14 प्रतिशत से अधिक रही है। यूपी का किसान अब केवल उत्पादन नहीं कर रहा, बल्कि खुशहाली की ओर बढ़ रहा है।

योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही खेती को हाशिये से निकालकर विकास के केंद्र में रखा। किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने से लेकर वैज्ञानिकों को लैब से निकालकर खेतों तक पहुंचाने जैसे फैसले लिए गए। विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत प्रदेश के 14,170 गांवों में 23.30 लाख किसानों से सीधा संवाद किया गया। इससे खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि विकास की मजबूत नींव बन गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसी सोच के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पारदर्शी खरीद व्यवस्था लागू की गई और समय पर भुगतान सुनिश्चित हुआ। नहरों के पुनर्जीवन, नलकूपों की संख्या बढ़ाने और सस्ती सिंचाई योजनाओं से खेती को नई ताकत मिली। सूखे और जल संकट वाले इलाकों में भी अब खेती संभव हो सकी है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21 किस्तों तक यूपी के किसानों को 94,668.58 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। दो करोड़ से अधिक किसानों को किसान पाठशाला के जरिए नई तकनीक से जोड़ा गया। 16 लाख निजी ट्यूबवेल से जुड़े किसानों का ऋण माफ हुआ। सहकारी एलडीबी के माध्यम से मिलने वाले कर्ज की ब्याज दर साढ़े 11 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई।

योगी सरकार ने गन्ना किसानों के लिए भी बड़े फैसले लिए। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी की गई। अगेती गन्ना 400 रुपये और सामान्य गन्ना 390 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया। इससे किसानों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। 2017 के बाद अब तक 2.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना भुगतान किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है।

सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड, उन्नत बीज, कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ा। बीज से लेकर बाजार तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत किया गया। सीड पार्क, टिश्यू कल्चर लैब और बासमती उत्पादन केंद्र जैसे प्रोजेक्ट भविष्य की खेती की नींव रख रहे हैं। योगी सरकार की नीतियों ने यह भरोसा दिया है कि खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि सम्मानजनक भविष्य का रास्ता है।

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