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योगी ने बॉस्केट में डाली बॉल, प्रतियोगिता का आगाज, कहा…ओलंपिक भारत मे हो यही कामना

डीडीयूजीयू में अंतर-विश्वविद्यालय बास्केटबॉल (महिला) प्रतियोगिता में 31 टीमें ले रहीं हिस्सा, सीएम ने कहा-प्रदेश सरकार अभी तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को दे चुकी है नौकरी

गोरखपुर, 16 जनवरी 2026:

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में पूर्वी क्षेत्र अंतर-विश्वविद्यालय बास्केटबॉल (महिला) प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। उन्होंने बॉल पकड़ी और किसी खिलाड़ी की तरह जमीन पर दो बार पटकने के बाद बॉस्केट की ओर उछाल दी। उन्होंने गुब्बारों को उनका आकाश सौंपा और खिलाड़ियों का हौसला भी बढ़ाया।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के बास्केटबॉल कोर्ट में 19 जनवरी तक चलने वाली महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता में देश के 31 विश्वविद्यालयों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए खेलों के महत्व पर जोर दिया।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भारतीय ऋषि-परंपरा इस बात का उद्घोष करती है कि ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’, तो वह यह बात यूं ही नहीं कहती। उसके पीछे का भाव यही रहता है कि जीवन के जितने भी साधन हैं, वे सभी स्वस्थ शरीर से ही प्राप्त किए जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश में हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान बनाए जा रहे हैं ताकि युवाओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। अब सिर्फ ओलिंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाड में मेडल जीतने वालों को ही नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार भी खिलाड़ियों को सम्मान और पुरस्कार दे रही है। अब तक 500 से ज्यादा खिलाड़ियों को अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी दी जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि डिप्टी एसपी, तहसीलदार और क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी के छह पद सीधे खिलाड़ियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। खेलकूद को सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए। इसके लिए प्रदेश में 96 हजार से अधिक स्पोर्ट्स किट युवक मंगल दल और महिला मंगल दल को दी गई हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी विश्वविद्यालयों से अपील की कि वे कम से कम एक खेल को गोद लें और खिलाड़ियों को तैयार करें। इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और युवा नशे व गलत आदतों से दूर रहेंगे। उन्होंने कहा कि जब युवा खेलेंगे तो खुद भी संवरेंगे और समाज को भी मजबूत बनाएंगे।

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प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेरठ में बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद खास शहर है। चौरी-चौरा आंदोलन से लेकर मुंशी प्रेमचंद की कर्मभूमि और गीता प्रेस जैसी संस्थाएं इस जिले की पहचान हैं।

उन्होंने कहा कि आज परिवार खेल को गंभीरता से ले रहे हैं और बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं किया जा रहा। ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले खिलाड़ी को सरकार 10 लाख रुपये की मदद और स्पोर्ट्स किट देती है। अगर कोई खिलाड़ी गोल्ड मेडल जीतता है तो उसे एकल खेल में 6 करोड़ रुपये और क्लास वन की नौकरी दी जाती है।

टीम गेम में गोल्ड मेडल पर 3 करोड़ रुपये का इनाम दिया जाता है। सिल्वर मेडल पर एकल खेल में 3 करोड़ और टीम गेम में डेढ़ करोड़ रुपये दिए जाते हैं। ब्रॉन्ज मेडल पर भी इसी तरह की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री हर भारतीय टीम को पूरा सहयोग और हौसला देते हैं। जीत के बाद खिलाड़ियों से खुद मिलकर उनका उत्साह बढ़ाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2030 के कॉमनवेल्थ और 2036 के ओलिंपिक खेल भारत में होंगे और भारतीय खिलाड़ी ज्यादा से ज्यादा मेडल जीतेंगे।

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