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यूपी : डिफेंस इंडस्ट्री को मिलेगी रफ्तार… 1000 एकड़ जमीन देने की तैयारी

झांसी, अलीगढ़, चित्रकूट और लखनऊ में 3,500 करोड़ के निवेश से बढ़ेगा रोजगार

लखनऊ, 16 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में सरकार एक और अहम कदम उठाने जा रही है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत करीब 1000 एकड़ अतिरिक्त जमीन निवेशकों को देने की तैयारी चल रही है। इससे राज्य में लगभग ₹3,500 करोड़ के निवेश की उम्मीद है और हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

डिफेंस सेक्टर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कई कंपनियां यूपी में यूनिट लगाने को तैयार हैं। साफ-सुथरी नीति, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज फैसलों की वजह से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

झांसी बना निवेशकों की पहली पसंद

डिफेंस कॉरिडोर में झांसी नोड सबसे आगे निकलता दिख रहा है। यहां गुडलक एस्ट्रा 247 एकड़ में करीब ₹1000 करोड़ का निवेश करेगी। वहीं रेडवुड ह्यूजेस भी इतनी ही जमीन पर ₹700 करोड़ लगाने की तैयारी में है। इसके अलावा सिटाडेल और गुरुत्वा जैसी कंपनियां भी डिफेंस और उससे जुड़े सेक्टर में बड़ा निवेश करना चाहती हैं। इससे बुंदेलखंड इलाके में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

अलीगढ़ और चित्रकूट में हाईटेक प्रोजेक्ट्स

अलीगढ़ फेज-2 में स्पेसकेम, मराल और जी-1 ऑफशोर जैसी कंपनियां केमिकल, ऑफशोर और डिफेंस सपोर्ट यूनिट लगाने की तैयारी में हैं। चित्रकूट में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 209.95 एकड़ जमीन पर ₹672 करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू करेगी। वहीं आईजी ड्रोन कंपनी ड्रोन टेक्नोलॉजी में करीब ₹100 करोड़ निवेश करने वाली है। इन प्रोजेक्ट्स से चित्रकूट को डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन हब के तौर पर पहचान मिलेगी।

लखनऊ में टेक्नोलॉजी और सपोर्ट यूनिट्स

राजधानी लखनऊ के डिफेंस नोड में नेक्सा मुंबई, इंद्रप्रस्थ और प्रोमोटेक जैसी कंपनियां कम जमीन में हाईटेक यूनिट लगाने की तैयारी में हैं। ये कंपनियां डिफेंस सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी और सपोर्ट सिस्टम से जुड़ा काम करेंगी। यूपीडा के पास अभी और भी कई निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिनके लिए जमीन देने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में चल रही है।

रोजगार और आत्मनिर्भरता को मिलेगा फायदा

इन सभी प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से हजारों युवाओं को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। स्थानीय एमएसएमई और स्टार्टअप्स को भी डिफेंस सप्लाई चेन से जुड़ने का मौका मिलेगा। इससे न सिर्फ प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।

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