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माघ मेला : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर डटे, प्रशासन की माफी तक आश्रम न जाने का ऐलान

प्रयागराज में स्नान के लिए जाते समय रथ यात्रा रोके जाने के दौरान हुए हंगामे से नाराजगी, कड़ाके की ठंड में रात में भी धरने पर बैठे रहे, नहीं किया भोजन, दी ये चेतावनी

प्रयागराज, 19 जनवरी 2026:

यूपी के प्रयागराज माघ मेले में रथ (पालकी) यात्रा रोके जाने के विरोध में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना सोमवार को भी जारी रहा। पुलिस उन्हें जिस स्थान पर छोड़कर गई थी वहीं वे रविवार रात कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठे रहे। शंकराचार्य ने कल से अनाज का एक दाना तक ग्रहण नहीं किया है। पानी पीना भी त्याग दिया है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार दोपहर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रशासनिक अधिकारी स्वयं आकर इस घटना के लिए माफी नहीं मांगते, तब तक वे अपने आश्रम या शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि हम फुटपाथ पर ही रहेंगे। सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ जब तक पुलिस हमें लेने नहीं आएगी तब तक मैं गंगा स्नान नहीं करूंगा। thehohalla news 

शंकराचार्य ने परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि इतिहास में जब भी शंकराचार्य स्नान के लिए गए हैं, वे पालकी में ही गए हैं। हर वर्ष इसी परंपरा का पालन होता रहा है। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वे भविष्य में हर माघ मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं रुकेंगे। उन्होंने कहा कि मैं आगे से फुटपाथ पर ही अपनी व्यवस्था करूंगा।

Swami Avimukteshwarananda Protest
Swami Avimukteshwarananda Protest

इससे पहले शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि कल की घटना के बाद से शंकराचार्य ने कुछ भी नहीं खाया है और कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य ने सुबह अपनी नियमित पूजा और दंड तर्पण भी उसी स्थान पर किया, जहां वे धरने पर बैठे हैं।

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इस बीच मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य की रथ यात्रा के दौरान हुए हंगामे का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। उसके मुताबिक पुलिस ने मार्ग पर बैरिकेडिंग की थी जिसको लेकर पुलिस और शंकराचार्य के समर्थकों के बीच कहासुनी हुई। विवाद बढ़ने पर समर्थकों ने बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ना शुरू कर दिया जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। फिलहाल शंकराचार्य अपने रुख पर अडिग हैं और पूरे मामले ने माघ मेले की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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