न्यूज डेस्क, 4 मई 2026:
पश्चिम बंगाल की सियासत में ऐसा भूचाल आया जिसकी कल्पना एग्जिट पोल भी नहीं कर पाए थे। इस चुनाव में अधिकांश सर्वे भाजपा को भारी बढ़त तो दे रहे थे लेकिन इस स्तर की सुनामी का अंदाजा किसी को नहीं था। नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया। राज्य में पहली बार भाजपा की प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनने जा रही है। दूसरी तरफ सीएम ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बुरी तरह सिमट गई है।
सबसे बड़ा झटका खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगा जो भवानीपुर सीट से अपने पुराने सहयोगी और अब विपक्ष के प्रमुख चेहरे शुभेंदु अधिकारी से 15 हजार से अधिक वोटों से हार गईं। चुनाव आयोग के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले जबकि ममता को 58,801 वोटों पर संतोष करना पड़ा। यह लगातार दूसरा मौका है जब ममता को शुभेंदु के हाथों हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 2021 में नंदीग्राम में भी वह करीब 1,500 वोटों से पराजित हुई थीं।
इस चुनाव में भाजपा की लहर इतनी तेज रही कि टीएमसी के कई मंत्री और दिग्गज नेता अपनी सीट नहीं बचा सके। वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य दमदम उत्तर से 16,000 वोटों से हार गईं। देबाशीष कुमार को रासबिहारी से 21,000 वोटों से शिकस्त मिली, जबकि शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु दमदम से 25,000 से अधिक वोटों से हार गए। राशन घोटाले में आरोपी ज्योतिप्रिय मल्लिक को हाबड़ा में 31,000 से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा।

महिला एवं बाल विकास मंत्री शशि पांजा श्यामपुकुर से चुनाव हार गईं, वहीं ममता के करीबी अरूप बिस्वास टॉलीगंज सीट नहीं बचा सके। सिंगूर से कृषि मंत्री बेचराम मन्ना 21,000 वोटों से हार गए। सूचना एवं संस्कृति मंत्री इंद्रनील सेन और वरिष्ठ नेता मानस भुइयां भी चुनाव हार गए। शिक्षक भर्ती घोटाले में घिरे परेश चंद्र अधिकारी को करीब 30,000 वोटों से हार मिली।
शहरी और उत्तरी बंगाल में भी टीएमसी का सूपड़ा साफ हो गया। अग्निशमन मंत्री सुजीत बसु बिधाननगर से 37,000 वोटों से हार गए, जबकि सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब को भाजपा के शंकर घोष ने 73,000 से अधिक वोटों से हराया। ममता के ‘दाहिने हाथ’ कहे जाने वाले शौकत मोल्ला को आईएसएफ नेता नौशाद सिद्दीकी ने 32,000 से ज्यादा वोटों से मात दी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों की बात करें तो 293 सीटों में भाजपा ने 206 सीटों पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। वहीं टीएमसी 81 सीटों पर सिमट गई। 2021 के मुकाबले उसे 134 सीटों का भारी नुकसान हुआ। कांग्रेस को सिर्फ 2 सीटें मिलीं, जबकि आम जनता उन्नयन पार्टी ने भी 2 सीटों पर जीत दर्ज की। अन्य के खाते में भी 2 सीटें गईं।
वर्ष 2021 में 215 सीटों के साथ सत्ता में लौटी टीएमसी के लिए यह हार सिर्फ चुनावी नहीं बल्कि राजनीतिक अस्तित्व पर बड़ा सवाल बन गई है। उधर भाजपा ने 2016 की 3 सीटों से सफर शुरू कर अब बंगाल की सत्ता पर कब्जा जमाकर अपने विस्तार का नया अध्याय लिख दिया है। बंगाल की जनता ने इस बार जो फैसला दिया उसने राज्य की राजनीति की पूरी दिशा बदल दी है।






