लखनऊ, 21 जनवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित विधानभवन में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के दूसरे दिन विधायी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित बनाने पर गहन मंथन हुआ। सम्मेलन में तीन प्रमुख विषयों विधायी प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग, विधायकों की क्षमता-वृद्धि और जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही पर व्यापक चर्चा की गई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकी का सार्थक उपयोग और विधायकों की निरंतर क्षमता वृद्धि ही विधायिकाओं को मजबूत, पारदर्शी और जनोन्मुखी बना सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए विधायी प्रक्रियाओं में गुणवत्ता के स्पष्ट और मापनीय मानक तय करना समय की मांग है। इससे न केवल कानून निर्माण की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि जनता का भरोसा भी और मजबूत होगा।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में लोकसभा अध्यक्ष स्वयं उपस्थित रहे और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सत्रों का संचालन किया। ओम बिरला ने देशभर की विधानसभाओं में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यप्रणाली में समाहित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की उस पहल को भी उल्लेखनीय बताया जिसमें विधायकों की शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर अनुभवों की पहचान कर उनका रचनात्मक उपयोग किया जा रहा है।

पूर्ववर्ती सम्मेलनों का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उत्कृष्टता, नवाचार और तकनीक के उपयोग जैसे मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लोकतांत्रिक शासन को और सुदृढ़ करेगी। उन्होंने देहरादून में वर्ष 2019 में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की चर्चाओं को स्मरण करते हुए बताया कि विधायी प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली में सुधार उनके दीर्घकालिक दृष्टिकोण का अहम हिस्सा रहा है।
ओम बिरला ने जानकारी दी कि इस दिशा में एक समिति का गठन किया गया है, जो देशभर की विधायी संस्थाओं में प्रक्रियाओं और प्रथाओं के मानकीकरण से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि लखनऊ सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श से विधायिकाओं की कार्यकुशलता बढ़ेगी, निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और भारतीय लोकतंत्र को नई मजबूती मिलेगी।






