लखनऊ, 23 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन एनर्जी और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। इसी कड़ी में औरैया जिले ने आवासीय सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक अहम और दूरगामी फैसला लिया है। जिले में अब नए आवासीय भवनों के नक्शे पास कराने के लिए सोलर रूफटॉप सिस्टम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। इस पहल का मकसद बिजली बचत के साथ-साथ पर्यावरण और जल संरक्षण को मजबूत करना है।
नक्शा पास कराने में सोलर और जल संरक्षण जरूरी
नई व्यवस्था के तहत नगर पालिका, नगर निगम और नगर पंचायतें अपनी बोर्ड बैठकों में प्रस्ताव पारित कर इसे लागू कर सकती हैं। नक्शा स्वीकृत होने के बाद भवन निर्माण के दौरान सोलर पैनल और वर्षा जल संचयन प्रणाली लगाना अनिवार्य होगा। इससे शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा और जल संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।
पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बना औरैया मॉडल
औरैया की इस पहल को प्रदेश के अन्य जिलों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल माना जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सभी जिलों में इस तरह के फैसले लिए जाने चाहिए, ताकि आवासीय सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग हो सके। उत्तर प्रदेश पहले से ही रूफटॉप सोलर सिस्टम के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सोलर से बिजली उत्पादन और पर्यावरण को फायदा
प्रदेश में अब तक 1191.64 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इनसे प्रतिदिन लगभग 50 लाख यूनिट कार्बन मुक्त बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है और प्रदूषण में कमी देखने को मिल रही है।
रोजगार, बचत और भूमि संरक्षण को बढ़ावा
रूफटॉप सोलर सिस्टम के जरिए आम लोगों को प्रतिदिन औसतन करीब 3.25 करोड़ रुपये की बिजली बचत का लाभ मिल रहा है। इस पहल से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और करीब 50 हजार लोगों को प्रत्यक्ष तथा लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। इसके साथ ही लगभग 4500 एकड़ भूमि का संरक्षण भी संभव हुआ है, जिसे अब अन्य विकास कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है। योगी सरकार का मानना है कि औरैया मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने से उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।






