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NEET पेपर लीक पर फूटा छात्रों का गुस्सा, LU में प्रदर्शन… NTA भंग करो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो

राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में मामले की न्यायिक जांच और परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की उठी मांग, कहा- मेहनत हमारी, सिस्टम माफियाओं का!

लखनऊ, 14 मई 2026:

देशभर में परीक्षा घोटालों और कथित नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर गुरुवार को यूपी की राजधानी लखनऊ में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर-एक पर विभिन्न छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), नेशनल स्टूडेंट्स यूथ फेडरेशन (NSYF), भीम आर्मी स्टूडेंट फेडरेशन (BASF) और भगत सिंह छात्र मोर्चा (BSM) के कार्यकर्ताओं के साथ दूसरे छात्र शामिल हुए।

छात्रों ने एनटीए भंग करो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो, पेपर लीक बंद करो और शिक्षा का निजीकरण बंद करो जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के बाद छात्रों ने भारत की राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से सौंपा।

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि देश में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार खत्म होती जा रही है। उनका कहना था कि हाल के वर्षों में दर्जनों परीक्षाएं पेपर लीक और संगठित भ्रष्टाचार से प्रभावित हुई हैं। इससे करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है। छात्रों ने कहा कि नीट यूजी 2026 पेपर लीक इसी गहरे संकट की एक और कड़ी है।

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आइसा की लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष शान्तम निधि ने कहा कि देश का युवा लगातार परीक्षा घोटालों, बेरोजगारी और शिक्षा के निजीकरण की मार झेल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीए पारदर्शिता का नहीं बल्कि केंद्रीकृत और ठेका आधारित अपारदर्शी व्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि जब परीक्षा संचालन निजी कंपनियों और ठेका मॉडल के हवाले किया जाएगा तो पेपर लीक और भ्रष्टाचार बढ़ना तय है। उन्होंने एनटीए को तत्काल भंग करने और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।

एनएसवाईएफ के अध्यक्ष अनिल राज ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक यह साबित करते हैं कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है। बीएएसएफ के उपाध्यक्ष वरुण आजाद ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को धीरे-धीरे बाजार और निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब, ग्रामीण, दलित और पिछड़े तबकों के छात्रों को उठाना पड़ रहा है।

वहीं, भगत सिंह छात्र मोर्चा के दीपांकर ने कहा कि पेपर लीक अब अपवाद नहीं बल्कि व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि जब करोड़ों युवाओं का भविष्य कुछ केंद्रीकृत परीक्षाओं पर निर्भर हो और वही परीक्षाएं भ्रष्टाचार से प्रभावित हों तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि सामाजिक अन्याय का प्रश्न बन जाता है।

ज्ञापन में छात्रों ने नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की सर्वोच्च न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच, एनटीए को भंग करने, परीक्षा संचालन में निजी कंपनियों की भूमिका खत्म करने और प्रभावित छात्रों को न्याय व मुआवजा देने की मांग की। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता लगातार टूटती रही तो युवाओं का लोकतांत्रिक संस्थाओं और समान अवसर के विचार से भरोसा भी कमजोर होता जाएगा।

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