लखनऊ, 24 जनवरी 2026:
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनगणना को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी जनगणना अधिसूचना में ‘जाति’ का कॉलम ही गायब है जो सीधे तौर पर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के अधिकारों के खिलाफ एक गहरी साजिश है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब अधिसूचना में जाति का कोई उल्लेख ही नहीं है, तो सरकार आखिर गिनती किस चीज की करेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जातिगत जनगणना भी भाजपा का एक और चुनावी जुमला साबित हुई है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा की रणनीति साफ है… न गिनती होगी, न जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिलेगा और न ही अधिकारों के लिए कोई ठोस आधार बनेगा।
अखिलेश यादव ने उन भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी निशाना साधा जो अब तक अपने-अपने समाज में जाकर जातिगत जनगणना होने का दावा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा पर भरोसा करने वाले लोग आज खुद को ठगा हुआ और अपमानित महसूस कर रहे हैं। ऐसे नेता अब अपने समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं और उन्हें अपने गले से भाजपाई पट्टा तथा घर-गाड़ियों से पार्टी का झंडा उतारना पड़ रहा है।
सपा अध्यक्ष ने भाजपा को ‘छलजीवी’ करार देते हुए कहा कि जब इस मुद्दे पर विरोध तेज होगा, तो भाजपा इसे हमेशा की तरह ‘टाइपिंग मिस्टेक’ बताकर पल्ला झाड़ लेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है और जनता उसके हर अगले कदम को पहले ही समझ जाती है। अखिलेश ने तीखे शब्दों में कहा कि अब शब्दकोश में ‘वचन-विमुखी’ भाजपा का अर्थ ‘धोखा’ लिख दिया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आह्वान किया कि पीडीए समाज को अपने मान-सम्मान, आरक्षण और अधिकारों की लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर आने वाले समय में सड़क से लेकर सदन तक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी।






