Lucknow City

सिन्धी संस्कृति उत्सव में छाया उल्लास…स्वाद, संगीत व संस्कारों का दिखा अनोखा संगम

रिचीरिच वाटिका में जुटे सिंधी समाज के लोग, भगवान झूलेलाल की आरती से हुआ शुभारंभ, मिठड़ी सिन्धी बोली बोलने का लिया संकल्प

लखनऊ, 27 जनवरी 2026:

हजरतगंज स्थित मोतीमहल रिचीरीच वाटिका सिन्धी समाज के भाषा और संस्कृति उत्सव का साक्षी बना। उत्साह और उल्लास के बीच सुबह से ही वाटिका सिन्धी व्यंजनों की खुशबू, फूलों की सजावट और रंग-बिरंगे परिधानों से महक उठी। भारत माता की जय और जय झूलेलाल के नारों से पूरा परिसर गूंजता रहा। पारंपरिक परिधान, पकवान ने समारोह को खुशनुमा बना दिया।

युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की पहल

मेला समिति के प्रवक्ता अशोक मोतियानी, अध्यक्ष रतन मेघानी और महामंत्री संजय जसवानी ने बताया कि आयोजन का मकसद युवा पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ना है। इस मौके पर लखनऊ की विभिन्न सिन्धी पंचायतों के मुखिया भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सिन्धु सभा अध्यक्ष अशोक मोतियानी ने उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई कि घरों में सिन्धी भाषा का प्रयोग किया जाएगा और निजी वाहनों व प्रतिष्ठानों में भगवान झूलेलाल की तस्वीर लगाई जाएगी। खास बात यह रही कि सिन्धी न बोलने पर किसी से जुर्माना नहीं लिया गया।

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उत्सव में सिन्धी समाज के वरिष्ठ नागरिक पारंपरिक सिन्ध और पाकिस्तानी शैली की वेशभूषा में नजर आए। महिलाएं और बच्चे एक-दूसरे से सिन्धी में अभिवादन करते हुए गले मिलते दिखे। माहौल पूरी तरह खुशनुमा रहा। सेल्फी प्वाइंट पर महिलाओं और युवाओं की खासी भीड़ नजर आई।

पांच रुपये में मिले पारंपरिक स्वाद

उत्सव में लगे स्टॉल पर कढ़ी चावल, दाल पकवान, डोडा चटनी, मीठी सिवइयां, आलू, कोकी, सिन्धी पापड़ और सिन्धी पकौड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन मात्र पांच रुपये में उपलब्ध कराए गए। स्टॉल पर दिनभर लोगों की भीड़ लगी रही।

संगीत, नृत्य और देशभक्ति का रंग

कार्यक्रम के दौरान सिन्धी स्कूलों के बच्चों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। ढोल-नगाड़ों और अलवर राजस्थान की सिन्धी शहनाई की धुन पर पुरुषों और महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। दोपहर एक बजे ध्वज फहराकर देशभक्ति गीत गाए गए और लगभग पांच सौ रंगीन गुब्बारे आसमान में छोड़े गए। इसके बाद भगवान झूलेलाल की आरती के साथ उत्सव की विधिवत शुरुआत हुई।

प्रतियोगिताएं और सम्मान समारोह

उत्सव में बेस्ट सिन्धी वेशभूषा प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार राजाराम भागवानी, दूसरा हंसराज राजपाल और तीसरा कियारा रमानी को दिया गया। सिन्धी कुकिंग प्रतियोगिता में स्नेहा पमनानी प्रथम, प्रेमा साहित्या द्वितीय और कामना केसवानी तृतीय स्थान पर रहीं। जूनियर शेफ का पुरस्कार स्वाति गुलवानी को मिला। उत्कृष्ट सामाजिक और संगठनात्मक योगदान के लिए सिन्धु सभा के अध्यक्ष अशोक मोतियानी, अनिल बजाज, जेपी नागपाल, श्याम किशनानी, नानक चंद लखमानी, मुरलीधर आहूजा, मोहनदास दास लदानी, राम बालानी और किशन चंद बमबानी को सम्मानित किया गया। सिन्धी वीर सपूतों की प्रदर्शनी लगाई गई और जरूरतमंदों को मुफ्त दवाइयां व चिकित्सा सुविधा दी गई। युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के स्टॉल पर लोग सलाह लेते नजर आए।

हिंद में सिंध की मांग पर भी हुई चर्चा

उत्सव के दौरान यह चर्चा भी हुई कि जिस तरह पाकिस्तान में सिंध प्रांत है, उसी तरह हिंदुस्तान में भी सिंध की मांग सरकार के सामने रखी जानी चाहिए। मेला समिति और सिन्धु सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि समाज में इस विषय को लेकर गंभीर मंथन हो रहा है। कार्यक्रम में सुरेश छबलानी, श्याम किशनानी, मनोज बचानी, मुरलीधर आहूजा, नानक चंद लखमानी, सतेन्द्र भवनानी, गुलाब जसवानी, सतीश लखमानी, राजू जसवानी, जय जीवानी, अशोक शर्मा, सुरेश तेजवानी, सुधा चांदवानी, कन्हैया लाल चंदानी, संतोष हिरवानी, नवीन केवल रमानी, अमरनाथ चौधरी, घनश्याम दास, रमेश कृपलानी, महेश जगतियानी, प्रकाश कृपलानी, प्रदीप मन्ना, रमेश बालानी, प्रदीप मूरजानी, राजेश सुमानी, सतीश अठवानी, सीए महेन्द्र सत्या, सीए भूपेश डोडेजा, सीए श्यामलाल मंध्यान, सीए सुनील चंदानी, मोहित जसवानी, शम्भू चांदवानी, संजय चांदवानी, आनंद खत्री, लाजवंती कनिका गुरनानी मौजूद रहे।

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