लखनऊ, 28 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में छात्र पंचायत के बैनर तले छात्रों ने हजरतगंज में गांधी प्रतिमा के पास UGC के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र पंचायत के अध्यक्ष शिवम पांडे के नेतृत्व में आए दर्जों छात्रों ने UGC को ‘सवर्ण विरोधी’ करार दिया। हाथों में तख्ती लेकर छात्रों ने जोरदार नारे लगाए और कहा, “बंटेंगे तो कटेंगे। एक हैं तो सेफ हैं।”
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि कानून कैंपस में जहर घोल रहा है। छात्र पंचायत के अध्यक्ष शिवम पांडे ने कहा कि यह कानून छात्रों के लिए खतरा है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई ओबीसी, जनजातीय या दलित छात्रा के साथ भेदभाव करता है तो क्या कार्रवाई होगी। पांडे ने आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग के छात्रों को भी निशाना बनाया जा रहा है और यह कानून राजनीतिक उद्देश्य से बनाया गया है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी कहा कि इस कानून में जुर्माने का प्रावधान पहले था, लेकिन इसे बदल दिया गया है। किसी छात्र के गलत शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए यह कानून बनाया गया है। छात्र नेताओं का कहना है कि जो मंत्री कभी कॉलेज नहीं गए, वे छात्रों के लिए नियम बना रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि UGC के नियम समाज को बांटने वाले हैं। इससे सामाजिक माहौल खराब होगा और राजनीतिक द्वेष फैलेगा। उन्होंने कहा कि बहुत सारे सवर्ण आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उन्हें भी इस कानून से नुकसान होगा। कानून केवल सवर्णों को आरोपी बनाता है, जबकि ओबीसी और एससी वर्ग में सक्षम लोग इसका गलत फायदा उठा सकते हैं।
प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि यह कानून छात्रों के हित में नहीं है और केवल राजनीतिक लाभ के लिए बनाया गया है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इसे तुरंत वापस लिया जाए, ताकि विश्वविद्यालयों में सामुदायिक सौहार्द और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।






