लखनऊ, 31 जनवरी 2026:
यूपी की राजधानी एवं नवाबों के शहर लखनऊ की पहचान अब केवल इमामबाड़ों और भूलभुलैया तक सीमित नहीं रहेगी। सीएम योगी ने राजधानी को एक विशिष्ट सांस्कृतिक कलेवर देने के लिए शहर के सभी सात प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य प्रवेश द्वार (Gateway of Culture) विकसित करने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लखनऊ में कदम रखते ही यात्रियों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत का अनुभव होना चाहिए। ये द्वार न केवल शहर की सीमा तय करेंगे, बल्कि संबंधित गंतव्यों की कहानी भी बयां करेंगे। शहर की सभी दिशाओं को उनके धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के आधार पर नाम दिया गया है।
डिजाइन में दिखेगी कला और तकनीक
इन प्रवेश द्वारों का निर्माण भारतीय पारंपरिक वास्तुकला के आधार पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि पत्थर की नक्काशी, ऊंचे स्तंभ, म्यूरल (भित्ति चित्र) और भव्य फव्वारों के साथ-साथ आधुनिक लाइटिंग और लैंडस्केपिंग का उपयोग हो। खास बात यह है कि इन द्वारों के निर्माण में CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) फंड का उपयोग किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को NHAI और संबंधित एजेंसियों से तालमेल बैठाकर जल्द से जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अब लखनऊ आने वाला हर सैलानी उत्तर प्रदेश के ‘सांस्कृतिक गौरव’ से रूबरू होकर ही शहर में प्रवेश करेगा।
जानिए किस मार्ग पर बनेगा कौन सा द्वार
संगम द्वार (रायबरेली रोड) : प्रयागराज की त्रिवेणी और महाकुंभ का वैभव दिखेगा।
नंदी द्वार (सुल्तानपुर रोड) : श्री काशी विश्वनाथ धाम की आध्यात्मिकता को दर्शाएगा।
सूर्य द्वार (अयोध्या मार्ग) : प्रभु श्रीराम और सूर्यवंश की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक होगा।
व्यास द्वार (सीतापुर रोड) : नैमिषारण्य की पौराणिक महत्ता को समर्पित।
धर्म द्वार (हरदोई रोड) : हस्तिनापुर के न्याय और धर्म का संदेश देगा।
कृष्ण द्वार (आगरा रोड) : मथुरा के कान्हा की नगरी का अहसास कराएगा।
शौर्य द्वार (उन्नाव रोड) : झांसी की वीरता और पराक्रम की याद दिलाएगा।






