अयोध्या, 5 फरवरी 2026:
नगर निगम की टीम ने फतेहगंज स्थित रामजानकी मंदिर के सामने एक दुकान को टैक्स बकाया बताकर इस तरह सील कर दिया गया कि दुकान के भीतर सो रही युवती बाहर तक नहीं निकल सकी। सर्दी में खुले आसमान के नीचे आया परिवार बेटी को बाहर निकालने की गुहार लगाता रहा। रात दस बजे बेटी रिहा हो सकी। अपर नगर आयुक्त ने इस मामले की जांच कराने की बात कही है।
फतेहगंज मोहल्ला निवासी सरोज देवी की दुकान और मकान तीन हिस्सेदारों में बंटा हुआ है। आगे दुकान और पीछे आवासीय हिस्सा है। नगर निगम की टीम बुधवार को टैक्स बकाया का हवाला देकर मौके पर पहुंची और बिना पूरी जांच किए केवल सरोज देवी के हिस्से को सील कर दिया। इसी दौरान सरोज देवी की एक बेटी दुकान के अंदर सो रही थी। शटर पर सील लगते ही वह अंदर ही फंस गई और बाहर नहीं निकल सकी।
सीलिंग के बाद ठंड के मौसम में सरोज देवी, उनका बेटा और बेटी दुकान के बाहर सड़क पर बैठने को मजबूर हो गए। परिवार का कहना है कि न तो उन्हें पहले कोई नोटिस दी गई थी और न ही मौके पर स्थिति देखने की कोशिश की गई। घटना की जानकारी मिलने पर नगर निगम के अधिकारी और पुलिस हरकत में आए।
क्षेत्राधिकारी नगर श्रीयश त्रिपाठी, नगर कोतवाल अश्विनी पांडेय और नगर निगम के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद शटर की सील तोड़ी गई और रात करीब साढ़े दस बजे युवती को बाहर निकाला जा सका। नगर निगम के अनुसार भवन पर करीब 90 हजार रुपये टैक्स बकाया है। पीड़िता सरोज देवी का कहना है कि उन्होंने अपने हिस्से के करीब 30 हजार रुपये पहले ही पट्टीदार को जमा कराने के लिए दे दिए थे। इसके बावजूद केवल उनके हिस्से पर ही कार्रवाई की गई।
सरोज देवी की पुत्री प्रियंका गुप्ता ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान निगम कर्मियों ने यह तक नहीं देखा कि घर के भीतर कोई मौजूद है या नहीं। अचानक की गई सीलिंग से उनकी बहन अंदर बंद हो गई। परिवार ने महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उनके लखनऊ में होने की जानकारी दी गई। अपर नगर आयुक्त सुमित कुमार ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।






