लखनऊ, 5 फरवरी 2026:
ई-रिक्शा व ई-ऑटो चालक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों चालक गुरुवार को नगर निगम पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। चालकों ने अपनी परेशानियों को सामने रखते हुए नगर निगम और आरटीओ विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान छह सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी गई कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन कर रहे चालकों का कहना है कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 117 में सार्वजनिक वाहनों के लिए नगर निकाय द्वारा सवारी चढ़ाने-उतारने के स्थान तय करने का प्रावधान है। वर्ष 2015 में बैटरी ई-रिक्शों को परमिट मुक्त किए जाने के बावजूद आज तक नगर निगम ने इनके लिए कोई ठहराव स्थल उपलब्ध नहीं कराया। इसी वजह से ई-रिक्शे सड़कों पर खड़े होते हैं और जाम की स्थिति बनती है।
संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि ई-रिक्शा योजना को बेरोजगारों के लिए रोजगार का जरिया बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन आरटीओ विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों की खुलेआम अनदेखी हुई। एक व्यक्ति के नाम एक ही ई-रिक्शा पंजीकरण के नियम के बावजूद कई लोगों के नाम दर्जनों ई-रिक्शे पंजीकृत कर दिए गए। इससे अमीर लोग इस योजना को कारोबार बना बैठे और गरीब चालक रोजी-रोटी के लिए जूझ रहे हैं।

चालकों के मुताबिक, लखनऊ में इस समय करीब 85 हजार ई-रिक्शे चल रहे हैं, जिनमें से बड़ी संख्या के पास फिटनेस, लाइसेंस और बीमा तक नहीं है। इसके बावजूद प्रवर्तन दल इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, जिससे यातायात व्यवस्था बिगड़ रही है और परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
मोर्चा का कहना है कि नगर निगम और आरटीओ अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए सारा बोझ यातायात पुलिस पर डाल देते हैं। जबकि यातायात पुलिस जाम की समस्या से निपटने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। जब तक नगर निगम और आरटीओ गंभीरता से कदम नहीं उठाएंगे, तब तक जाम से राहत मिलना नामुमकिन है।
एक और बड़ा मुद्दा निजी बैंकों का भी उठाया गया। चालकों का कहना है कि कई निजी बैंक भारी रकम लेकर ई-रिक्शों का फाइनेंस कर रहे हैं, जिससे हर दिन ई-रिक्शों की संख्या बढ़ती जा रही है। अगर इसकी जांच हो और नियम सख्त किए जाएं तो शहर में ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या पर लगाम लग सकती है।
संयुक्त मोर्चा ने बताया कि बीते आठ वर्षों से ठहराव स्थल की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक कोई जगह नहीं दी गई। नतीजा यह है कि यातायात सुधार और बेरोजगारी के बीच आम लोग पिस रहे हैं। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो सरकार के सामने यातायात और बेरोजगारी दोनों बड़ी समस्या बनकर खड़ी हो जाएंगी। मोर्चा ने नगर निगम से मांग की कि जल्द से जल्द ई-रिक्शों के लिए ठहराव स्थल चिन्हित किए जाएं और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू हो सके।
प्रदर्शन में संगठन के पदाधिकारी अमित सोनकर, मुन्ना लाल यादव, इरफान खान, मारिफ अली खान मारूफ, मयंक श्रीवास्तव, एहसान खान, रविन्द्र निषाद, मो. शरीफ, लल्लू सोनकर, अहमद हुसैन, अजीज, आसिफ रहमान, शब्बू अंसारी और शारिफ खान आदि तमाम चालक व संचालक शामिल रहे।






