Uttar Pradesh

बुंदेलखंड में घर-घर पानी: सूखे की धरती पर बहने लगी उम्मीदों की धारा

गांव की महिलाओं को अब पानी के लिए नहीं तलाश करने पड़ते कुंए, हैंडपंपों में लगने वाली भीड़ से मिला छुटकारा, सामाजिक सुरक्षा भी बढ़ी

लखनऊ, 9 फरवरी 2026:

कभी सिर पर घड़ा रखकर मीलों दूर से पानी ढोती महिलाएं, हैंडपंप पर लगी लंबी कतारें और हर गर्मी के साथ गहराता जल संकट… यह बुंदेलखंड की पहचान बन चुकी थी। पानी की कमी यहां सिर्फ एक समस्या नहीं बल्कि भुखमरी, बीमारी और पलायन की वजह भी रही है लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। सड़कों पर दूर से दिखने वाली ऊंची पानी की टंकियां और घर-घर पहुंचे नल बुंदेलखंड में नई उम्मीद की कहानी कह रहे हैं।

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महोबा में कभी वाटर ट्रेन से पानी पहुंचाने की नौबत आ गई थी। आज जल जीवन मिशन के तहत पांच परियोजनाओं के जरिए एक लाख 12 हजार से अधिक घरों तक पाइपलाइन कनेक्शन पहुंच चुके हैं। 1131 किलोमीटर सड़कों की खुदाई के कारण लोगों को अस्थायी परेशानी जरूर झेलनी पड़ी लेकिन स्थानीय निवासी अरशद कहते हैं कि थोड़ी तकलीफ तो विकास में होती ही है, पर हर घर नल हमारे लिए बहुत बड़ी राहत है।

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चित्रकूट के पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर ब्लॉक में सिलौटा ग्राम समूह योजना ने सवा लाख से अधिक लोगों को राहत दी है। पहले लोग लगभग एक किलोमीटर दूर से पानी लाते थे। अब 17 ओवरहेड टैंकों के जरिए यमुना नदी से शुद्ध पानी घरों तक पहुंच रहा है। बरहट की ग्राम प्रधान रज्जन देवी भावुक होकर कहती हैं कि अब बच्चे नहा-धोकर स्कूल जाते है। स्वच्छता की आदत खुद-ब-खुद बन रही है। रैपुरा और चांदी बांगर जैसी योजनाओं से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिला है।

झांसी के बड़ागांव, चिरगांव और बंगरा ब्लॉक के अंतिम छोर के गांवों तक पाइपलाइन पहुंच चुकी है। गैरहा गांव के 65 वर्षीय कामता प्रसाद कहते हैं कि यह दिन देखने को आंखें तरस गई थीं। पहले आधा किलोमीटर दूर से पानी लाने वाली महिलाएं अब घर की टोंटी खोलकर साफ पानी पा रही हैं। सरकारी स्कूलों और आरोग्य मंदिरों में भी स्वच्छ जल उपलब्ध होने से बच्चों और मरीजों को राहत मिली है।

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बांदा में अमलीकौर और खटान पेयजल परियोजनाओं से 544 गांवों और 82 हजार से अधिक घरों तक पानी पहुंच चुका है। हमीरपुर में 320 गांवों में घर-घर नल से जलापूर्ति शुरू हो गई है। कभी सूखे और प्यास के लिए पहचाने जाने वाले बुंदेलखंड में अब जल जीवन मिशन के जरिए बदलाव की धारा बह रही है। यह प्यास बुझाने के साथ बेहतर स्वास्थ्य, स्वच्छता और भविष्य की उम्मीद भी दे रही है।

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