लखनऊ, 9 फरवरी 2026:
यूपी विधानमंडल के बजट सत्र का आगाज सोमवार को हंगामे के साथ हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के बाद सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। इसका समाजवादी पार्टी के विधायकों ने कड़ा विरोध किया।। शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
सदन में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पहली बार वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों का ब्योरा रखते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आर्थिक व्यवस्था बन चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश की जीडीपी 13 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। साथ ही प्रतिव्यक्ति आय इस साल 1.20 लाख रुपये होने का अनुमान है।

वित्त मंत्री के मुताबिक बीते एक साल में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया और पेट्रोल-डीजल के दाम देश के अधिकांश राज्यों की तुलना में यूपी में कम हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जहां पहले निवेशक यूपी में आने से कतराते थे, अब 50 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्ताव सामने आ रहे हैं। उन्होंने 2017 के 3.47 लाख करोड़ रुपये के बजट की तुलना करते हुए कहा कि अब यह बढ़कर 8.33 लाख करोड़ रुपये हो चुका है।
वित्त मंत्री के बयान पर सपा विधायकों ने तीखा एतराज जताया। सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने की बात कार्य मंत्रणा समिति में नहीं रखी गई थी। इस पर सदन में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री ने वही बातें दोहराईं जो राज्यपाल ने अभिभाषण में कहीं। हम चाहते हैं कि इन दावों पर चर्चा हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।
कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा ने राज्यपाल के अभिभाषण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्यपाल ने पूरा भाषण नहीं पढ़ा और कई अंश छोड़ दिए, क्योंकि यह झूठी इबारत थी। इससे पहले सपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा साइकिल से विधानसभा पहुंचे जो चर्चा का केंद्र बना रहा। बजट सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तल्खी साफ नजर आई जिससे आने वाले दिनों में तीखी बहस के संकेत हैं।






