लखनऊ, 9 फरवरी 2026:
यूपी विधानमंडल के बजट सत्र की शुरुआत सोमवार को राज्यपाल के संयुक्त अधिवेशन के संबोधन के साथ हुई। इस पर बसपा प्रमुख और पूर्व सीएम मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में मायावती ने कहा कि राज्यपाल का भाषण संसदीय परंपरा के अनुरूप तो था लेकिन अगर यह परंपरा से हटकर प्रदेश के वास्तविक विकास और सर्वसमाज के व्यापक हितों को लेकर थोड़ा अधिक उत्साहपूर्ण और ठोस होता तो बेहतर संदेश जाता।
मायावती ने प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में करोड़ों लोग सरकार की गलत नीतियों और कार्यशैली से दुखी और त्रस्त हैं। गरीबी और बेरोजगारी के चलते आम परिवारों को गंभीर आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की सबसे बड़ी चिंता अपनी जान, माल और मजहब की सुरक्षा को लेकर है।उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज माननीया राज्यपाल द्वारा विधानमण्डल के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधन की संसदीय परम्परा से शुरू हुआ, किन्तु उनका यह भाषण परम्परा से हटकर प्रदेश के विकास व सर्वसमाज के उत्थान सहित व्यापक जनहित में वास्तविक व थोड़ा उत्साही होता तो यह बेहतर होता।…
उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज माननीया राज्यपाल द्वारा विधानमण्डल के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधन की संसदीय परम्परा से शुरू हुआ, किन्तु उनका यह भाषण परम्परा से हटकर प्रदेश के विकास व सर्वसमाज के उत्थान सहित व्यापक जनहित में वास्तविक व थोड़ा उत्साही होता तो यह बेहतर होता।…
— Mayawati (@Mayawati) February 9, 2026
ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राज्यपाल को सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहिए था जिससे जनता के साथ-साथ विपक्ष को भी कुछ भरोसा मिलता। बसपा प्रमुख का कहना है कि संभवतः इन्हीं मुद्दों के अभाव के कारण राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष की ओर से नारेबाजी और हंगामा देखने को मिला।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबोधन में भाजपा सरकार द्वारा किए गए बड़े-बड़े जनहित और जनकल्याण संबंधी दावों, आश्वासनों और वादों को पूरा करने की ठोस जानकारी का अभाव रहा। मायावती ने उम्मीद जताई कि आगामी बजट भाषण में इन कमियों को दूर किया जाएगा और जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।






