लखनऊ, 10 फरवरी 2026:
उत्तर प्रदेश हरित और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा रहा है। आर्थिक समीक्षा 2025-26 के मुताबिक प्रदेश अब साफ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सौर ऊर्जा नीति 2022 और जैव ऊर्जा नीति के असर साफ दिखने लगे हैं और आने वाले वर्षों में प्रदेश की ऊर्जा जरूरतें बड़े पैमाने पर हरित स्रोतों से पूरी होंगी।
22 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा का लक्ष्य
आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि सौर ऊर्जा नीति 2022 के तहत अगले पांच वर्षों में 22,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें 6,000 मेगावाट रूफटॉप सोलर से, 14,000 मेगावाट बड़े सोलर पार्क और यूटिलिटी स्केल परियोजनाओं से और 2,000 मेगावाट पीएम कुसुम योजना के जरिए हासिल किए जाएंगे।
नीति के तहत करीब 13.50 लाख घरों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जाने हैं। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जाएगा, जिससे आम लोगों को सस्ती और साफ बिजली मिल सके।

अयोध्या बनेगी मॉडल सोलर सिटी
प्रदेश सरकार ने अयोध्या को मॉडल सोलर सिटी के तौर पर विकसित करने का फैसला किया है। इसके अलावा 16 नगर निगम और नोएडा को भी सोलर सिटी के रूप में तैयार किया जाएगा। बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में ट्रांसमिशन से जुड़ी सहूलियतें देने, सरकारी और निजी जमीन पर रियायती लीज और 30,000 युवाओं को सोलर सेक्टर में हुनरमंद बनाने की योजना भी इसी नीति का हिस्सा है। नेट मीटरिंग के जरिए ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप परियोजनाओं को केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है।
सौर ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
आर्थिक समीक्षा के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2017 में प्रदेश में सौर ऊर्जा की क्षमता महज 288 मेगावाट थी। अब यह बढ़कर 2,815 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यह बढ़ोतरी प्रदेश की ऊर्जा नीति और निवेश के अनुकूल माहौल को दर्शाती है।
जैव ऊर्जा में देश में सबसे आगे यूपी
जैव ऊर्जा नीति 2022 के अच्छे नतीजे भी सामने आए हैं। जैव कचरे के इस्तेमाल, सीबीजी प्लांट, बायो कोल, बायो डीजल और बायो एथेनॉल को बढ़ावा देने से उत्तर प्रदेश 213 टन प्रतिदिन की सीबीजी उत्पादन क्षमता के साथ देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
खेती में सौर ऊर्जा का बढ़ा इस्तेमाल
खेती के क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पीएम कुसुम योजना के तहत वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 3,024 कृषि पंपों का सोलराइजेशन किया गया। योजना के घटक सी-2 के तहत अलग कृषि बिजली फीडरों के सोलराइजेशन के लिए पहले चरण में 22 सबस्टेशनों पर 34.8 मेगावाट की परियोजनाओं के पीपीए हो चुके हैं। दूसरे चरण में 567 सबस्टेशनों पर 1,586.44 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ अवार्ड जारी किए जा चुके हैं।
साफ हवा और साफ ऊर्जा पर फोकस
आर्थिक समीक्षा में यह भी बताया गया है कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत चुने गए 130 शहरों में तय गतिविधियों को जमीन पर उतारा जा रहा है। इसका मकसद वायु गुणवत्ता में सुधार और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। फिलहाल आर्थिक समीक्षा यह साफ संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश अब हरित ऊर्जा को लेकर सिर्फ योजनाएं नहीं बना रहा, बल्कि ठोस नतीजों के साथ आगे बढ़ रहा है।






