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आल्हा-उदल का महोबा बनेगा टूरिज्म हब… स्वदेश दर्शन 2.0 से पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार

बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा में 24.98 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा इंटीग्रेटेड टूरिज्म डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, सन इंटरप्रिटेशन सेंटर होगा खास आकर्षण, पर्यटन मंत्री ने साझा किया प्रोजेक्ट

महोबा/लखनऊ, 10 फरवरी 2026:

आल्हा-उदल की वीर गाथाओं से पहचानी जाने वाली चंदेलकालीन धरती महोबा अब पर्यटन के नए नक्शे पर उभरने जा रही है। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत जिले में बड़े पैमाने पर पर्यटन विकास कार्य शुरू किए गए हैं, जिससे महोबा को कल्चरल और एजुकेशनल टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा। अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद अब सरकार का फोकस बुंदेलखंड क्षेत्र पर है, ताकि यहां की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को नई मजबूती मिल सके।

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों पर महोबा में करीब 24.98 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड टूरिज्म डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चल रहा है। परियोजना की पहली किस्त के रूप में कुल लागत का 10 प्रतिशत कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल, बांदा को जारी किया जा चुका है। इस प्रोजेक्ट का मकसद बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाकर पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। इसके तहत सन इंटरप्रिटेशन सेंटर, तिकोना गार्डन, भव्य प्रवेश द्वार और आधुनिक साइनेज की व्यवस्था की जा रही है। पूरे प्रोजेक्ट को वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड सिर्फ एक इलाका नहीं, बल्कि भारत के इतिहास और सभ्यता का अहम हिस्सा है। आल्हा-उदल जैसे वीरों की धरती महोबा आज भी अपनी गौरवशाली विरासत के लिए जानी जाती है। उन्होंने बताया कि स्वदेश दर्शन 2.0 जैसी योजनाएं महोबा की पहचान को नए सिरे से स्थापित कर रही हैं। वर्ष 2025 में जिले में करीब 28 लाख पर्यटक पहुंचे, जो यहां बढ़ते आकर्षण का साफ संकेत है। यह परियोजना पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाएगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने में मददगार साबित होगी।

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इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण सन इंटरप्रिटेशन सेंटर होगा, जिसे 4,210 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यहां भारतीय परंपरा में सूर्य के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व को आसान और दिलचस्प तरीके से दिखाया जाएगा। सेंटर की छत दिन के आठ प्रहरों का प्रतीक होगी। परिसर में विशेष रूप से तैयार की गई सूर्यघड़ी सूरज की पहली किरणों के आधार पर समय बताएगी। साथ ही सोलर पैनल, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, ग्रास पेवर्स और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे ग्रीन और सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।

सन इंटरप्रिटेशन सेंटर में कई इंटरैक्टिव गैलरियां बनाई जाएंगी। एक गैलरी में भारतीय परंपरा और पश्चिमी मान्यताओं को जोड़ते हुए सूर्य और ग्रीक देवता हेलिओस की कहानी चित्रों और मूर्तियों के जरिए दिखाई जाएगी। दूसरी गैलरी में कोणार्क और मार्तंड जैसे प्रमुख सूर्य मंदिरों के मॉडल और विजुअल एलिमेंट्स होंगे। सूर्य और खगोल विज्ञान से जुड़ी गैलरी में मौसम, कैलेंडर और आकाशीय गतिविधियों में सूर्य की भूमिका समझाई जाएगी। अंत में 3डी प्रोजेक्शन और साउंड इफेक्ट्स के जरिए सूर्य और मानव जीवन के रिश्ते को प्रभावी ढंग से पेश किया जाएगा।

परियोजना के तहत सन इंटरप्रिटेशन सेंटर से करीब चार किलोमीटर दूर शिवतांडव रोड पर एक खूबसूरत तिकोना गार्डन भी विकसित किया जा रहा है। गार्डन के बीचों-बीच सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य देव की भव्य प्रतिमा स्थापित होगी, जिसे महोबा का नया सांस्कृतिक लैंडमार्क माना जा रहा है। इसके अलावा पर्यटकों के स्वागत के लिए तीन भव्य प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं, जिन पर सैंडस्टोन से बनी सूर्य देव की नक्काशीदार प्रतिमाएं लगाई जाएंगी। इससे शहर की विजुअल पहचान और विरासत को नई मजबूती मिलेगी।

अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने कहा कि बुंदेलखंड का इतिहास बेहद प्राचीन और समृद्ध है। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत महोबा में चल रहा यह प्रोजेक्ट केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ऐसी जगहें तैयार करना है, जहां खासकर छात्र और युवा इस क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति को करीब से समझ सकें। सन इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसे प्रयास हेरिटेज, विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान को एक साथ जोड़कर एजुकेशनल टूरिज्म को बढ़ावा देंगे।

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