लखनऊ, 15 फरवरी 2026:
यूपी में महिलाओं और बच्चों की सेहत, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर सरकारी योजनाओं ने कुछ वर्षों में तेज रफ्तार पकड़ी है। महिला और बाल विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्य ने मिशन सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 के तहत पोषण, मातृत्व देखभाल और शुरुआती बचपन की सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार किया है।
प्रदेश में छह साल तक के बच्चों के लिए तय लक्ष्य 1.45 करोड़ से अधिक में से 98.42 फीसदी बच्चों की पोषण सेवाओं के लिए मैपिंग हो चुकी है। वहीं गर्भवती महिलाओं के बीच संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 99.97 फीसदी तक पहुंच गया है। यह ग्रामीण-शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच को दिखाता है। 40 हजार से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मियों के जरिए करीब 93 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जा रही है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव दिख रहा है। एनुअल प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन प्लान 2022-23 के तहत प्रदेश के सभी 22,290 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को रेगुलर सेंटर में बदला जा चुका है। इसके अलावा 23,697 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र में अपग्रेड करने की मंजूरी मिली है। इससे शुरुआती बचपन की देखभाल और प्री-स्कूल एजुकेशन की सुविधाएं मजबूत होंगी।

महिलाओं की सुरक्षा और संकट में सहायता के लिए मिशन शक्ति के तहत वन स्टॉप सेंटरों की भूमिका अहम रही है। 31 अक्टूबर 2025 तक इन केंद्रों के जरिए लगभग 2.96 लाख महिलाओं को मदद मिल चुकी है। महिला हेल्पलाइन ने भी 31 दिसंबर 2025 तक 9.18 लाख से ज्यादा महिलाओं को सहायता पहुंचाई है। इसे कॉमन हेल्पलाइन नंबर और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से जोड़ा गया है।
बच्चों की देखभाल के लिए मिशन वात्सल्य के तहत सभी 75 जिलों में 191 चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन संचालित हैं। ये हजारों जरूरतमंद बच्चों को संस्थागत और नॉन-इंस्टीट्यूशनल केयर दे रहे हैं। साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सेवाओं के साथ बेहतर तालमेल बन रहा है।
महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास सुविधा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत 4,000 बेड वाले आठ वर्किंग वुमन हॉस्टल को मंजूरी दी है। कुल ₹381.56 करोड़ की स्वीकृति में से बड़ी राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। साथ ही सामर्थ्य कंपोनेंट के तहत नए शक्ति सदन और सखी निवास जैसी पहलें महिलाओं के पुनर्वास और संरक्षण को और मजबूती दे रही हैं।






