लखनऊ, 16 फरवरी 2026:
प्रदेश के बजट 2026-27 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर को खास अहमियत दी गई है। सरकार का फोकस साफ है कि छोटे उद्योगों को सिर्फ अनुदान पर निर्भर न रखकर उन्हें आत्मनिर्भर और बाजार में टिकाऊ बनाया जाए। यही वजह है कि इस क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत अधिक है।
प्रदेश में इस समय करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां काम कर रही हैं और लगभग तीन करोड़ परिवारों की रोजी-रोटी इन्हीं से जुड़ी है। ऐसे में बजट में किया गया निवेश सीधे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला माना जा रहा है। सरकार ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। योजना का लक्ष्य हर साल एक लाख नए सूक्ष्म उद्यम खड़े करना है।
अनुमान है कि पांच साल में पांच लाख से ज्यादा नई इकाइयां शुरू हो सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनेंगे। बैंक ऋण और सरकारी सहयोग के साथ निवेश का असर कई गुना बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
छोटे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत बैंक से ऋण लेने की रहती है। जमानत न होने की वजह से कई उद्यमी औपचारिक व्यवस्था से बाहर रह जाते हैं। बजट में ऋण गारंटी व्यवस्था मजबूत करने और बैंकों के साथ बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है। इससे बिना बड़ी जमानत के भी कारोबार शुरू करना आसान हो सकेगा और कई इकाइयां असंगठित क्षेत्र से निकलकर औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल होंगी।
क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा दिया गया है। सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र के लिए 575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साझा मशीनरी, परीक्षण लैब और कॉमन सुविधाएं मिलने से छोटे उद्योगों की लागत घटेगी और उनके उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होगी। इससे उन्हें बड़े बाजारों में अपनी जगह बनाने में मदद मिलेगी।
ओडीओपी योजना के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 225 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिससे युवा नौकरी तलाशने के बजाय खुद का काम शुरू करने के लिए प्रेरित होंगे। अगर हर नया उद्यम औसतन पांच से दस लोगों को रोजगार देता है तो इससे हजारों युवाओं के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।
बजट में आधारभूत ढांचे पर लगातार निवेश को भी एमएसएमई के लिए बड़ा सहारा माना जा रहा है। एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक कॉरिडोर, बेहतर बिजली व्यवस्था और मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क से उत्पादन लागत कम होगी और समय पर सप्लाई आसान बनेगी। व्यापार सुगमता, सिंगल विंडो सिस्टम और ऑनलाइन स्वीकृति प्रक्रिया से निवेशकों का भरोसा भी बढ़ रहा है।
सरकार का मकसद सिर्फ उद्योगों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार क्षमता को मजबूत करना है। बजट 2026-27 को इसी दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में रोजगार सृजन का मजबूत आधार बन सकता है।






