Uttar Pradesh

मिट्टी से सोना उगाने की कहानी : योगी सरकार के नवाचारों से UP के किसान बन रहे उद्यमी

प्रदेश के गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में ‘कम लागत-अधिक उत्पादन’ नीति और कृषि नवाचारों ने किसानों के लिए खोली नई राह, सरकारी प्रयास और मेहनत से आय दोगुनी

गोरखपुर/वाराणसी/कानपुर, 19 फरवरी 2026:

यूपी की धरती पर इन दिनों खेती सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि मुनाफे का मजबूत मॉडल बनती दिख रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार की ‘कम लागत-अधिक उत्पादन’ नीति और कृषि नवाचारों ने अन्नदाता किसानों को प्रदेश की आर्थिक समृद्धि में साझेदार बनाने की नई राह खोली है। 2026-27 के बजट में कृषि योजनाओं के लिए 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ ₹10,888 करोड़ का प्रावधान इस संकल्प की गवाही देता है। बजटीय सहारे से जहां किसानों की आय बढ़ रही है वहीं गांवों में बुनियादी ढांचे का चेहरा भी बदल रहा है।

प्रदेश के गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में किसान सरकारी योजनाओं से उत्साहित हैं। काशी की मिट्टी पर सदियों से ‘मां अन्नपूर्णा’ का आशीर्वाद माना जाता है। वाराणसी में 94,188 हेक्टेयर में खेती और तीन लाख से अधिक किसानों की आजीविका कृषि पर टिकी है। यहां सोलर पंप योजना से सिंचाई आसान हुई है। किसान सतीश सिंह और अजीत कुमार बताते हैं कि बिजली पर निर्भरता घटने से लागत कम हुई और फसल समय पर पानी मिलने से उत्पादन बढ़ा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने प्राकृतिक आपदाओं में राहत दी और किसान पाठशाला, बीज-खाद की समय पर उपलब्धता और यंत्रों पर अनुदान ने खेती को तकनीकी रूप से मजबूत किया।

कृषि नवाचार की तस्वीर कानपुर के घाटमपुर ब्लॉक के कोरियां गांव में भी साफ दिखती है। किसान देवेंद्र वर्मा ने ‘खेत तालाब योजना’ के तहत तालाब बनवाकर वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन शुरू किया। नियमित जल शुद्धता, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज और संतुलित चारे से वे एक सीजन में 8 से 9 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। तालाब के किनारों पर अन्य कृषि गतिविधियों से अतिरिक्त आय भी हो रही है। देवेंद्र मानते हैं कि सरकारी मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग से जोखिम कम हुआ और खेती लाभकारी उद्यम में बदली।

उधर, गोरखपुर के ब्रह्मपुर ब्लॉक में एफपीओ से जुड़े किसानों ने त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत स्वीट कॉर्न की खेती कर आय दोगुनी करने का रास्ता पकड़ा है। बीज पर 90 प्रतिशत अनुदान से लागत घटकर 8-10 हजार रुपये प्रति एकड़ रह गई। कृषि विभाग की फील्ड-गाइडेंस से ढाई माह में फसल तैयार हुई और औसतन 40 क्विंटल प्रति एकड़ उपज मिली। स्थानीय बाजार में 30 रुपये किलो के भाव से बिक्री कर किसानों ने प्रति एकड़ एक से सवा लाख रुपये तक कमाए जो पारंपरिक धान की खेती से कहीं अधिक है।

एफपीओ संचालक आकिब जावेद के मुताबिक बजट में एफपीओ के लिए रिवॉल्विंग फंड की व्यवस्था से सामूहिक खेती और विपणन को नई ताकत मिलेगी। यूपी के खेतों में नवाचार की फसल लहलहा रही है। यहां किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं बल्कि आत्मनिर्भर उद्यमी बन रहे हैं।

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