वाराणसी, 19 फरवरी 2026:
यूपी के प्रयागराज में बटुक की चोटी खींचे जाने और ब्राह्मण समाज की कथित नाराजगी के बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा गुरुवार को 101 ब्राह्मण बटुकों का सम्मान करने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यूपी सरकार और भाजपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि लखनऊ में ब्राह्मण बटुकों का सम्मान कर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने केवल अपनी भावना जताई है लेकिन इससे प्रयागराज की घटना का ‘पाप’ नहीं धुल सकता।
शंकराचार्य ने कहा कि अगर सरकार का कदम सच में संवेदनशीलता से भरा होता तो जिस बटुक की चोटी खींची गई थी, उसी को बुलाकर सम्मानित किया जाता। उन्होंने तंज कसा कि पीड़ित को छोड़कर मनपसंद बटुकों पर पुष्पवर्षा और तिलक करना कार्रवाई नहीं, सीधी राजनीति है।
उन्होंने यह भी ऐलान किया कि 20 दिन का अल्टीमेटम 11 मार्च को पूरा हो रहा है। इस दिन वे साधु-संतों और सनातनियों के साथ लखनऊ जाएंगे और जांच के बाद जो निष्कर्ष निकलेगा उसे वहीं सार्वजनिक करेंगे। गोरक्षा की मांग को लेकर भी उसी दिन प्रदर्शन का एलान किया गया है।
अविमुक्तेश्वरानंद का दावा है कि भाजपा के 100 से अधिक कार्यकर्ता, पूर्व विधायक और पदाधिकारी प्रदेश सरकार की मंशा स्पष्ट न होने से नाराज होकर उनके शरण में आ रहे हैं और पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने दोनों डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य पर तंज कसते हुए कहा कि वे पार्टी को हो रही क्षति बचाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि मठाधीश महाराज अपने हठ पर अड़े हैं।
शंकराचार्य ने कालनेमि कौन है? का सवाल उठाते हुए कहा कि असली हिंदू और वेशधारी ढोंगियों में फर्क साफ किया जाए। साथ ही संत समाज को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि वे बताएं किसके साथ हैं, जो उनके पक्ष में होगा, उसके साथ भी मुख्यमंत्री जैसा व्यवहार किया जाएगा।






