लखनऊ, 20 फरवरी 2026:
उत्तर प्रदेश में निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार यानी आरटीई योजना को लेकर इस साल अभिभावकों का भरोसा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है। सत्र 2026-27 के पहले चरण में ही आवेदन संख्या ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। इस बार 2,61,501 आवेदन मिले हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 1,32,446 आवेदन आए थे। यानी करीब 97 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवार अब बच्चों की बेहतर शिक्षा को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं पर उनका भरोसा बढ़ा है।
सरकार की ओर से योजना को आसान और पारदर्शी बनाने पर खास जोर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग ने गांव और शहर स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए, अभिभावकों से सीधे संवाद किया गया और आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया। ऑनलाइन सिस्टम को पहले से ज्यादा आसान किया गया, जिससे ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों के लोग भी बिना परेशानी आवेदन कर सके।
इसके अलावा हेल्पडेस्क की व्यवस्था, समय पर सूचना और स्कूलों की जवाबदेही तय करने जैसे कदमों से पूरी प्रक्रिया में भरोसा बढ़ा। यही वजह रही कि बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों के लिए निजी स्कूलों में मुफ्त प्रवेश के अवसर का लाभ लेने आगे आए।
आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित श्रेणी के बच्चों को निजी विद्यालयों में निशुल्क दाखिले का प्रावधान है। बढ़ती आवेदन संख्या को सामाजिक बदलाव के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि अब परिवार शिक्षा को बच्चों के बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव मान रहे हैं।
शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को योजना का लाभ मिले और पूरी नामांकन प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की पहल से शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक समावेशन को मजबूती मिल रही है और अलग-अलग वर्गों के बच्चों को समान अवसर मिल पा रहे हैं।






