Uttar Pradesh

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप… होगी FIR, कोर्ट ने दिया ये आदेश, जानें पूरा मामला

शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर दो नाबालिगों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप, अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को सिरे से किया खारिज, याचिकाकर्ता को बताया ‘हिस्ट्रीशीटर’

प्रयागराज, 22 फरवरी 2026:

प्रयागराज की अदालत से एक महत्वपूर्ण आदेश सामने आया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ दो नाबालिगों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। जिला अदालत में पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया।

याचिका एक धर्मगुरु के शिष्य की ओर से दोनों नाबालिगों के संरक्षक के रूप में दाखिल की गई थी। आरोप है कि माघ मेले के दौरान ‘गुरु-सेवा’ के बहाने बच्चों का यौन शोषण किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी और पीड़ित बच्चों के बयान भी न्यायालय में दर्ज कराए गए। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने निष्पक्ष और त्वरित जांच पर जोर दिया है। 14 पन्नों के आदेश में कहा गया है कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए पीड़ितों और आरोपियों का चिकित्सीय परीक्षण भी कराया जा सकता है।

कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि मामला गुरु-शिष्य परंपरा की पवित्रता से जुड़ा है इसलिए सच्चाई सामने आना सार्वजनिक हित में है। उधर वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को ‘हिस्ट्रीशीटर’ बताया। उन्होंने दावा किया कि आरोप लगाने वाला लोगों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर धन उगाही करता है और दाखिल हलफनामों में से एक फर्जी है।

उन्होंने कहा कि वह अदालत से राहत की अपील नहीं करेंगे और निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी। देशभर की निगाहें अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर टिकी हैं। अदालत के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज होने के साथ ही जांच की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी और आने वाले दिनों में मामले की दिशा तय होगी।

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