लखनऊ, 22 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को नई उड़ान मिलने जा रही है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए 2,883.93 करोड़ रुपये के बाह्य ऋण को हरी झंडी दे दी है। यह ऋण न्यू डेवलपमेंट बैंक से भारत सरकार की संप्रभु गारंटी के साथ लिया जाएगा। कुल 5,801.05 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से लखनऊ मेट्रो फेज-1बी को निर्णायक रफ्तार मिलेगी।
आर्थिक कार्य विभाग की अध्यक्षता में हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। बैठक में नीति आयोग, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से विशेष सचिव मनोज कुमार ने प्रस्ताव रखा। यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने परियोजना की तकनीकी और वित्तीय रूपरेखा पेश की।

ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर चारबाग से वसंत कुंज तक 11.165 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें 7 भूमिगत और 5 एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित हैं। खास बात यह है कि चारबाग पर यह मौजूदा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर से जुड़ेगा। इससे यात्रियों को आसान इंटरचेंज मिलेगा। पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी से रोज़मर्रा की यात्रा तेज और सुविधाजनक होगी।
निर्माण की तैयारियां भी जोर पकड़ चुकी हैं। दो बड़े सिविल टेंडर जारी हो चुके और बाकी प्रक्रियाधीन हैं। इससे पहले यूपीएमआरसी ने लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो परियोजनाएं यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरी की हैं। न्यू डेवलपमेंट बैंक से मिली यह मंजूरी उत्तर प्रदेश में मेट्रो विस्तार के वित्तीय ढांचे को और मजबूत करेगी।
यूपीएमआरसी प्रबंधन का कहना है कि ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि व्यापार, रोजगार और शहरी विकास को भी नई गति मिलेगी। लाखों यात्रियों को राहत देने वाली यह परियोजना लखनऊ को आधुनिक शहरी परिवहन के अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है।






