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शंकराचार्य विवाद पर अखिलेश का तीखा वार : सरकार ने हद पार की, 20 साल पुरानी फाइलें खोलकर बदनाम करने की साजिश!

सपा मुखिया ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता वास्तव में रामभद्राचार्य का शिष्य है तो अतीत में उन पर दर्ज मुकदमा वापस लेना उनकी गलती थी, शंकराचार्य को संगम स्नान से रोकना सनातन परंपरा और सम्मान दोनों के खिलाफ

लखनऊ, 22 फरवरी 2026:

सपा मुखिया एवं पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने शंकराचार्य विवाद को लेकर प्रदेश सरकार और संत रामभद्राचार्य पर तीखा हमला बोला। रविवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश ने कहा कि जिस तरह से शंकराचार्य को संगम स्नान से रोका गया और फिर बीस साल पुरानी घटनाओं को उछालकर विवाद खड़ा किया गया वह सनातन परंपरा और सम्मान दोनों के खिलाफ है।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि जब शंकराचार्य कई दिनों तक कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठे थे तब सरकार के समर्थक चुप्पी साधे रहे। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में किसी शंकराचार्य को स्नान से रोका जाना कभी नहीं हुआ। यह पहली बार है कि इस तरह का अपमान हुआ। उन्होंने आगे कहा कि अगर शिकायतकर्ता वास्तव में रामभद्राचार्य का शिष्य है, तो अतीत में रामभद्राचार्य पर दर्ज मुकदमा वापस लेना उनकी गलती थी। अखिलेश ने तीखे शब्दों में कहा कि विचारों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस स्तर तक जाकर आरोप लगवाना बेहद घटिया राजनीति है।

प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए अखिलेश ने आरोप लगाया कि सम्मान देने का नाटक अब तब किया जा रहा है, जब मामला राजनीतिक रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि जब शिखा पकड़कर अपमान हो रहा था, तब ये लोग कहां थे? संगम किनारे उसी वक्त जाना चाहिए था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को हर बात बीस साल बाद याद आती है।

मुख्यमंत्री पर परोक्ष हमला करते हुए अखिलेश ने कहा कि विदेश यात्राओं और धार्मिक प्रतीकों से योग्यता सिद्ध नहीं होती। उन्होंने गोरखपुर में कथित बदहाल व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए। अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि जनता सरकार को नकार चुकी है। अखिलेश ने कहा कि
जितनी पीड़ा बढ़ेगी, उतना हमारा पीडीए आंदोलन मजबूत होगा। समाजवादी घबराने वाले नहीं हैं। सुरक्षा भी छिन जाए तो भी हम सरकार बदलकर रहेंगे।

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