लखनऊ, 27 फरवरी 2026:
उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में आगे ले जाने की दिशा में जापान दौरा अहम साबित होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यात्रा के दौरान जापान के यामानाशी प्रांत के साथ हुए समझौते में ग्रीन हाइड्रोजन को सहयोग का मुख्य आधार बनाया गया है। इस साझेदारी में उत्पादन, नई तकनीक, रिसर्च, स्किल ट्रेनिंग और औद्योगिक इस्तेमाल जैसे कई अहम पहलू शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में प्रदेश को नई रफ्तार मिलेगी।
प्रदेश सरकार ने बजट 2026-27 में अतिरिक्त ऊर्जा विकास के लिए 2,104 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की है। इसे ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की बड़ी तैयारी माना जा रहा है।
यामानाशी ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के लिए दुनिया के अग्रणी क्षेत्रों में गिना जाता है। दौरे के दौरान वहां मौजूद आधुनिक हाइड्रोजन ऊर्जा सुविधा केंद्र में पावर टू गैस तकनीक का मॉडल देखा गया। इस सिस्टम में सौर और पवन ऊर्जा से बनी बिजली को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से हाइड्रोजन में बदला जाता है। बाद में यही हाइड्रोजन ऊर्जा भंडारण, ईंधन और क्लीन ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है। प्रदेश में भी इसी मॉडल को लागू करने पर काम शुरू करने की बात कही गई है।
इस समझौते का बड़ा हिस्सा शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़ा है।
तय हुआ है कि उत्तर प्रदेश के तकनीकी संस्थानों के छात्र जापान जाकर हाइड्रोजन उत्पादन, स्टोरेज, सुरक्षा और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल की आधुनिक तकनीक सीखेंगे। उन्हें सिर्फ किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं बल्कि प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि लौटकर वे प्रदेश की इंडस्ट्री और ऊर्जा परियोजनाओं में इसे लागू कर सकें।
इसी कड़ी में आईआईटी कानपुर में ग्रीन हाइड्रोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। यह केंद्र रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री पार्टनरशिप का बड़ा हब बनेगा। यहां उत्पादन लागत कम करने, सुरक्षित स्टोरेज सिस्टम और ग्रीन मोबिलिटी पर काम होगा। सरकार की कोशिश है कि रिसर्च सीधे उद्योगों तक पहुंचे और नई तकनीक जमीन पर दिखाई दे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का अहम आधार बनेगा और प्रदेश आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर पहले से तैयारी कर रहा है। जापान के साथ तकनीकी सहयोग से वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि ट्रेनिंग, रिसर्च और औद्योगिक उपयोग की यह संयुक्त रणनीति उत्तर प्रदेश को देश में ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर का प्रमुख केंद्र बना सकती है।
प्रदेश में इस दिशा में काम पहले ही शुरू हो चुका है। गोरखपुर जिले के खानीपुर गांव में राज्य के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन किया जा चुका है। यह सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में ग्रीन हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस मिश्रण की बड़ी पहल मानी जा रही है। इस परियोजना के तहत ग्रीन हाइड्रोजन को सीएनजी और पीएनजी में मिलाकर घरेलू उपभोक्ताओं, उद्योगों और परिवहन क्षेत्र तक पहुंचाया जा रहा है। अनुमान है कि इससे हर साल करीब 500 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा। यह संकेत भी माना जा रहा है कि प्रदेश सिर्फ योजनाओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि जमीन पर बदलाव की शुरुआत कर चुका है।






