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पश्चिम एशिया तनाव से शेयर बाजार धड़ाम… सेंसेक्स 2700 अंक टूटा, निफ्टी 24700 के नीचे

विदेशी पूंजी निकासी, बढ़ते भू राजनीतिक खतरे और महंगे कच्चे तेल से बाजार में घबराहट, निवेशकों के आठ लाख करोड़ रुपये डूबे

बिजनेस डेस्क, 2 मार्च 2026:

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर निवेश माहौल के कारण शुरुआती कारोबार में तेज बिकवाली देखने को मिली। जोखिम लेने से बच रहे निवेशकों ने बाजार से दूरी बनाई, जिसका सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा।

सुबह कारोबार शुरू होते ही BSE का सेंसेक्स करीब 2743 अंक टूटकर 78543 के आसपास पहुंच गया। वहीं NSE का निफ्टी 533 अंकों की गिरावट के साथ 24645 के स्तर पर आ गया और 24700 के नीचे फिसल गया। शुरुआती सत्र में रुपये में भी कमजोरी रही और डॉलर के मुकाबले यह 24 पैसे गिरकर 91.32 पर पहुंच गया।

निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट

बाजार में तेज गिरावट का असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर भी पड़ा। कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में बाजार पूंजीकरण करीब आठ लाख करोड़ रुपये घट गया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के लगभग 463.50 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 455 लाख करोड़ रुपये रह गया।

वैश्विक तनाव बना बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि Iran को लेकर बढ़ती सैन्य आशंकाओं और United States तथा Israel से जुड़े घटनाक्रमों ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना दिया है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से निकलकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

सोना और डॉलर बने सुरक्षित ठिकाना

तनाव बढ़ने के साथ सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी है। सोने की कीमतों में तेजी आई और यह करीब 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। चांदी में भी मजबूत उछाल देखा गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अनिश्चितता जारी रहने पर इक्विटी बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी

भारतीय बाजार ही नहीं, एशिया के प्रमुख बाजारों में भी गिरावट रही। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग और सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स सूचकांक दबाव में रहे। अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी कमजोरी के संकेत मिले, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता साफ दिखी।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो पिछले एक साल से अधिक समय का ऊंचा स्तर है। तेल महंगा होने से महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका भी बाजार की गिरावट की बड़ी वजह मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति साफ नहीं होती, तब तक बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करना चाहिए।

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