लखनऊ/उन्नाव, 3 मार्च 2026:
फाल्गुन पूर्णिमा पर इस बार ग्रह-नक्षत्रों के विशेष संयोग ने होली के पर्व को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी। प्रदेश के कई शहरों में सोमवार देर रात 12 बजे के बाद होलिका दहन किया गया, जबकि कुछ स्थानों पर आज शाम को भी दहन होगा। चंद्रग्रहण और भद्रा काल के कारण आज रंग नहीं खेला जाएगा। अब 4 मार्च को रंगभरी होली मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से भद्रा काल शुरू हो गया था, जो 3 मार्च की सुबह 5:31 बजे तक रहा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भद्रा में शुभ कार्य करना उचित नहीं माना जाता। यही वजह रही कि पारंपरिक समय पर होलिका दहन नहीं किया गया।
हालांकि भद्रा के पुच्छकाल में, यानी रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच दहन का समय मान्य माना गया। इसी दौरान कई स्थानों पर होलिका जलाई गई। कुछ जगहों पर आज शाम ग्रहण समाप्ति के बाद दहन किया जाएगा। 3 मार्च को वर्ष का पहला चंद्रग्रहण पड़ रहा है। यह ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण है, जिसकी अवधि दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगी। भारत में ग्रहण की शुरुआत दिखाई नहीं देगी क्योंकि चंद्रोदय से पहले ही ग्रहण लग जाएगा।

शाम करीब 6:12 बजे चंद्रोदय होगा और उसके बाद कुछ हिस्सों में ग्रहण की समाप्ति देखी जा सकेगी। सूतक काल सुबह 9:20 बजे से प्रभावी हो चुका है और ग्रहण मोक्ष तक रहेगा। ग्रहण समाप्ति के बाद 4 मार्च को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और घृति योग में होली खेली जाएगी। ऐसे में स्पष्ट है कि होलिका दहन अलग-अलग समय पर हुआ या होगा, लेकिन रंगों का पर्व 4 मार्च को पूरे जोश और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।
उन्नाव : शुक्लागंज में 500 स्थानों पर सजी मनमोहक होलिका, फाग गीतों के बीच हुआ दहन
शुक्लागंज गंगा घाट क्षेत्र में होली पर्व के अवसर पर होलिका दहन का कार्यक्रम श्रद्धा, उत्साह और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। पोनी रोड तिराहा, मनोहर नगर, ओम शांति निकेतन, ब्रह्म नगर, चंपापुरवा, आजाद नगर, इंदिरा नगर, सुभाष नगर समेत आसपास के कई मोहल्लों में परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ होलिका दहन किया गया।
बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु गंगा घाट क्षेत्र में करीब 500 से अधिक स्थानों पर होलिका जलाई गई। हर जगह श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने होलिका की आकर्षक रूप से साज सज्जा की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की दुआ की। कई स्थानों पर महिलाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। होलिका दहन के बाद लोगों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की मुबारकबाद दी।






