Uttar Pradesh

मिशन मोड में स्किलिंग : UPSDM ने ITP को सौंपे सेक्टरवार लक्ष्य, उद्योग की मांग के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण

कौशल विकास कार्यक्रमों को मिशन मोड में संचालित कर युवाओं को उद्योग आधारित, रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराना योगी सरकार की कोशिश, प्रशिक्षण शुरू करने से पहले पोर्टल पर सत्यापन जरूरी, यूपी में रोजगार के अवसरों में होगी बढ़ोतरी

लखनऊ, 4 मार्च 2026:

यूपी में कौशल विकास को रोजगार से सीधे जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने प्रशिक्षण प्रदाताओं (ITPs) को सेक्टरवार लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं। यह कार्रवाई नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) योजना के अंतर्गत की गई है। योगी सरकार की मंशा है कि कौशल विकास कार्यक्रमों को मिशन मोड में संचालित कर युवाओं को उद्योग आधारित, रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।

यूपीएसडीएम निदेशालय की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि प्रशिक्षण प्रदाताओं को निर्धारित गुणवत्ता मानकों और शर्तों का कड़ाई से पालन करते हुए लक्ष्य पूरा करना होगा। संस्थानों को उनके पूर्व प्रदर्शन और आवेदन क्रम के आधार पर लक्ष्य सौंपे गए हैं। उदाहरण स्वरूप वेलस्पन लिविंग लिमिटेड (बरेली) को परिधान क्षेत्र में 200, इमार्टिकस लर्निंग प्राइवेट लिमिटेड (जालौन) को हेल्थकेयर व परिधान सेक्टर में 100-100 तथा स्किल्ड टेलरिंग इंस्टीट्यूट बाय रेमंड (लखनऊ) को 50 प्रशिक्षुओं का लक्ष्य दिया गया है।

प्रशिक्षण अवधि अधिकतम 600 घंटे निर्धारित की गई है। आवासीय प्रशिक्षण में प्रतिदिन न्यूनतम 8 घंटे कक्षाएं अनिवार्य होंगी। प्रशिक्षण शुरू करने से पहले पोर्टल पर सत्यापन जरूरी होगा। सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल से संबद्ध होकर मानक पाठ्यक्रम के आधार पर प्रशिक्षण देना होगा जबकि मूल्यांकन भी काउंसिल के माध्यम से ही कराया जाएगा।

प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति और अन्य विवरण एनएसडीसी एवं एसडीएमएस पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य रहेगा। सत्यापन के बाद ही अनुदान राशि जारी की जाएगी। लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित लक्ष्य उसी वित्तीय वर्ष में पूरा करना अनिवार्य होगा, अन्यथा आगामी आवंटन प्रभावित हो सकता है। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप सेक्टर आधारित प्रशिक्षण, निजी भागीदारी और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए प्रदेश में स्किल इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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