बिजनेस डेस्क, 12 मार्च 2026:
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक संकेतों की कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव में बाजार लाल निशान में कारोबार करता नजर आया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 950 अंकों से अधिक टूटा जबकि निफ्टी करीब 300 अंक गिरकर 23,600 के नीचे फिसल गया।
सुबह साढ़े नौ बजे के करीब बीएसई सेंसेक्स 946 अंक यानी करीब 1.2 प्रतिशत गिरकर 75,918 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 296 अंक या लगभग 1.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,571 पर कारोबार करता दिखा। बाजार की कमजोरी का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी पड़ा और ये सूचकांक करीब 1.5 प्रतिशत तक टूट गए। सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में देखने को मिला। निफ्टी के 16 में से 14 सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट में कारोबार कर रहे थे।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 9 प्रतिशत उछलकर फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का दाम भी लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे ऑयल टैंकरों पर ईरान के हमलों की खबरों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
हालांकि, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने पहली बार बड़े पैमाने पर अपने आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का ऐलान किया है। इसके बावजूद कीमतों में तेजी थमती नजर नहीं आ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती तेल कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव शेयर बाजार के लिए फिलहाल नकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
इस बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को एफआईआई ने लगातार नौवें दिन करीब 6,267 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। मार्च में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 39,100 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने पिछले सत्र में लगभग 4,965 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की।
ग्लोबल बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले। एशियाई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई जबकि अमेरिकी बाजार भी पिछली रात कमजोरी के साथ बंद हुए। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा और रुपया 30 पैसे गिरकर डॉलर के मुकाबले 92.34 के स्तर के करीब पहुंच गया। यह इसके रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास है।






