Uttar Pradesh

गाजियाबाद में सोलर रूफटॉप व रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य…प्रदेश के लिए बना नया मॉडल

नए मकानों के नक्शे पास कराने में सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन जरूरी, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की पहल

लखनऊ, 13 मार्च 2026:

प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की जा रही है। इसी कड़ी में गाजियाबाद ने आवासीय सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। अब जनपद में नए बनने वाले आवासीय भवनों के नक्शे पास कराने की प्रक्रिया में सोलर रूफटॉप सिस्टम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है।

जिलाधिकारी के निर्देश के बाद इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतें अपने-अपने बोर्ड की बैठकों में प्रस्ताव पारित कर इसे लागू करेंगी। नक्शा स्वीकृत होने के बाद भवन निर्माण में सोलर पैनल और वर्षा जल संचयन प्रणाली लगाना जरूरी होगा। इसका मकसद बिजली की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है। इससे शहरी ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा और लोगों को बिजली पर होने वाले खर्च में राहत मिलेगी।

प्रदेश में रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में करीब 1440 मेगावाट की रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित हो चुकी है। इससे 60 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। खास बात यह है कि यह बिजली बिना कोयला जलाए तैयार हो रही है, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव भी कम हो रहे हैं।

रूफटॉप सोलर के चलते आम उपभोक्ताओं को रोजाना औसतन करीब 4 करोड़ रुपये की बिजली बचत का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। लगभग 60 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और बड़ी संख्या में लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूफटॉप सोलर मॉडल से बड़े सोलर प्लांट के लिए जमीन की जरूरत कम होती है। इससे प्रदेश में करीब 5000 एकड़ भूमि का संरक्षण संभव हुआ है, जिसे अब अन्य विकास परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक मजबूती के लिहाज से इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि गाजियाबाद की तर्ज पर अन्य जिलों में भी ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिससे प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा का दायरा और बढ़ सके।

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