लखनऊ, 16 मार्च 2026:
यूपी में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने के लिए योगी सरकार डिजिटल तकनीक का तेजी से इस्तेमाल कर रही है। प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री अभियान के जरिए किसानों का सटीक डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंच सकेगा।
प्रदेश में खरीफ और रबी दोनों सीजन के दौरान बड़े पैमाने पर डिजिटल क्रॉप सर्वे कराया गया है। इसके तहत राजस्व गांवों में खेतों और फसलों का जियो टैग्ड सर्वे कर सटीक आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। प्रदेश के कुल 1,08,935 राजस्व गांवों में से 95,765 गांवों का जियो रेफरेंसिंग कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। यह इस अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
जियो रेफरेंसिंग के आधार पर खरीफ सीजन में 5,37,08,511 से अधिक प्लॉट का डिजिटल सर्वे अंतिम रूप से स्वीकृत किया गया। रबी सीजन में भी 5,56,44,677 से अधिक प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इससे फसलों की वास्तविक स्थिति, उत्पादन और खेती के रकबे का सटीक आकलन संभव हो रहा है।
किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी मिशन मोड में चलाया जा रहा है।
केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लगभग 2,88,70,495 लाभार्थी हैं। सत्यापन अभियान के बाद 2,31,36,350 से अधिक किसानों का डेटा उपलब्ध हो चुका है। इनमें से अब तक 1,67,01,996 से अधिक पीएम किसान लाभार्थी फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकृत हो चुके हैं। यह कुल लक्ष्य का करीब 72.19 प्रतिशत है।
इसके अलावा लगभग 28,37,162 ऐसे किसान भी फार्मर रजिस्ट्री में शामिल किए गए जो पीएम किसान योजना के लाभार्थी नहीं हैं। सरकार का मानना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री से किसानों का सटीक और व्यापक डाटाबेस तैयार होगा। इससे फसल बीमा, कृषि अनुदान, आपदा राहत और अन्य योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुंचाने में आसानी होगी।
सरकार के मुताबिक कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग से उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। आने वाले समय में इससे किसानों को योजनाओं का लाभ और अधिक प्रभावी तरीके से मिलने की उम्मीद है।






