योगेंद्र मलिक
देहरादून, 17 मार्च 2026
देहरादून में मंगलवार को सचिवालय में हुई दो अहम बैठकों में विकास और जरूरी सेवाओं को लेकर बड़े फैसले लिए गए। एक तरफ सीमांत गांवों के लिए वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत 402 करोड़ के नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई, तो दूसरी तरफ एलपीजी गैस सप्लाई की स्थिति की समीक्षा कर अफसरों को सख्त निर्देश दिए गए।
सीमांत गांवों में अब पर्यटन से लेकर सड़क तक होगा काम
मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक में सीमांत इलाकों के गांवों के विकास पर फोकस रखा गया। करीब 402 करोड़ के जिन प्रस्तावों को मंजूरी मिली है, उनमें गांवों में पर्यटन हाउसिंग, सड़क कनेक्टिविटी, अस्पताल, खेल मैदान, स्मार्ट क्लास, छोटे जिम सेंटर, सोलर स्ट्रीट लाइट और खेती से जुड़े काम शामिल हैं। मुख्य सचिव ने कहा इन प्रोजेक्ट्स का मकसद साफ है, सीमांत गांवों में रोजगार के मौके बढ़ें और लोगों की जिंदगी बेहतर हो। अफसरों को साफ कहा गया कि काम सिर्फ कागज पर नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए।

गांव ऐसे बनें कि दूसरे भी सीख लें
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि काम में पारदर्शिता रहे और क्वालिटी से कोई समझौता न हो। जिलाधिकारियों से कहा गया कि योजनाओं का असर क्या पड़ रहा है, लोगों की आमदनी में कितना फर्क आ रहा है, इसका पूरा ब्यौरा भी तैयार करें। कोशिश यह है कि कुछ गांव ऐसे तैयार हों जो मॉडल बन सकें।
गैस सप्लाई पर भी कड़ी नजर, कालाबाजारी पर चेतावनी
दूसरी बैठक में प्रदेश में एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर समीक्षा की गई। अफसरों ने बताया कि फिलहाल राज्य में गैस की कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य बनी हुई है। इसके बावजूद मुख्य सचिव ने साफ कहा कि किसी भी हाल में सप्लाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। जिलाधिकारियों से सीधे फीडबैक लिया गया और उन्हें अलर्ट रहने को कहा गया।
छापेमारी बढ़ाने के निर्देश
बैठक में गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी पर खास तौर पर सख्ती के निर्देश दिए गए। कहा गया कि लगातार छापेमारी हो, स्टॉक की जांच होती रहे और जो भी गड़बड़ी मिले उस पर तुरंत कार्रवाई हो। अफसरों को यह भी कहा गया कि गैस कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ तालमेल बनाए रखें, ताकि सप्लाई चेन में कहीं रुकावट न आए।






