लखनऊ, 17 मार्च 2026:
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में मायावती ने इन दलों को दलित-विरोधी करार देते हुए उन पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए बसपा संस्थापक कांशीराम का नाम इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां दलित वोटों को साधने के लिए कांशीराम की जयंती मनाने और उन्हें भारत रत्न देने की मांग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति हास्यास्पद है क्योंकि जब कांग्रेस की केंद्र में सरकार थी तब उसने कांशीराम को भारत रत्न देने की पहल नहीं की। अब दूसरी पार्टी की सरकार से यह मांग करना केवल राजनीतिक दिखावा है।
1. सपा व कांग्रेस आदि ये दलित-विरोधी पार्टियाँ, इस बार यू.पी. में विधानसभा आमचुनाव के नज़दीक आते ही, इनके वोटों के स्वार्थ में बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की सोची-समझी रणनीति के तहत् जयंती मनाकर तथा कांग्रेस पार्टी तो अपनी केन्द्र की सरकार में रहकर…
— Mayawati (@Mayawati) March 17, 2026
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस शुरू से ही बसपा को कमजोर करने और खत्म करने की कोशिश करती रही हैं जबकि यह वही पार्टी है जिसकी नींव कांशीराम ने रखी थी। उन्होंने कहा कि बसपा के संस्थापक की विचारधारा और संगठन को उनके जीते-जी कोई हिला नहीं सकता।
मायावती ने यह भी कहा कि इन पार्टियों के अपने महापुरुषों में अब जान नहीं रही इसलिए वे बसपा के महापुरुषों को राजनीतिक लाभ के लिए भुनाने में लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांशीराम के जीवनकाल में भी इन दलों ने उनकी उपेक्षा की और बसपा सरकार द्वारा उनके सम्मान में किए गए कई कार्यों को सपा सरकार ने बदल दिया था।
अपने बयान के अंत में मायावती ने सपा-कांग्रेस से जुड़े लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि विशेषकर दलित समाज के ऐसे चमचे यदि चुप रहें तो उनके लिए बेहतर होगा। उन्होंने याद दिलाया कि कांशीराम ने इसी मानसिकता को उजागर करने के लिए ‘चमचा युग’ नामक पुस्तक भी लिखी थी।






