लखनऊ, 20 मार्च 2026:
प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन और कृषि निर्यात राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने आलू के भंडारण, बाजार भाव और विपणन आदि अहम मुद्दों पर तस्वीर साफ की। उन्होंने बताया कि दो दिन के भीतर केंद्र की मदद से अमोनिया गैस की सप्लाई बहाल हो गई है। अब शीतगृह में भंडारित आलू को कोई खतरा नहीं है।
राज्यमंत्री ने कृषि उत्पादन मंडी परिषद में अफसरों के साथ बैठक करने के बाद मीडिया से रूबरू होकर कहा कि इस साल प्रदेश में आलू की पैदावार अच्छी रही और फसल आने से पहले ही उसके भंडारण और बाजार की तैयारी कर ली गई थी। राज्य के किसानों ने अपनी उपज का करीब 70 फीसदी हिस्सा, लगभग 150 लाख मीट्रिक टन आलू, शीतगृहों में सुरक्षित रख दिया था। दूसरे राज्यों में आपूर्ति के इंतजाम भी किए गए थे। ओडिशा सरकार के साथ 15 लाख मीट्रिक टन आलू खरीद का समझौता भी हुआ था।
इसी बीच शीतगृहों में अमोनिया गैस की आपूर्ति अचानक रुक गई। इससे कोल्ड स्टोरेज की कूलिंग प्रभावित होने लगी और भंडारित आलू के खराब होने का खतरा खड़ा हो गया। दो-तीन दिन की देरी भी बड़े नुकसान में बदल सकती थी, जिससे किसान और शीतगृह संचालक परेशान हो गए।
राज्यमंत्री ने बताया कि पहले राज्य स्तर पर समाधान की कोशिश हुई, लेकिन अमोनिया का विकल्प न होने के कारण बात आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद मामला केंद्र सरकार तक पहुंचाया गया। उर्वरक और रसायन मंत्रालय और पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय से संपर्क के बाद तेजी से फैसला लिया गया। प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद 24 घंटे के भीतर निर्देश जारी किए गए कि शीतगृहों को अमोनिया गैस की सप्लाई तुरंत शुरू की जाए।
दो कार्यदिवस के भीतर आपूर्ति बहाल हो गई और शीतगृहों की कूलिंग सामान्य होने लगी। इससे भंडारित आलू को नुकसान से बचाने में राहत मिली। यहां अपर मुख्य सचिव बी एल मीणा, निदेशक उद्यान भानु प्रकाश राम, संयुक्त निदेशक राजीव कुमार वर्मा, आलू उत्पादक किसान संगठन के प्रतिनिधि और कई शीतगृह संचालक मौजूद रहे।






