योगेंद्र मलिक
देहरादून, 22 मार्च 2026:
उत्तराखण्ड राज्य ने पर्यटन और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में पिछले चार वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने न केवल धार्मिक और एडवेंचर पर्यटन को बढ़ावा दिया, बल्कि समाज के हर वर्ग को सम्मान और सुविधा देने वाले निर्णय भी लिए। राज्य में आस्था, रोमांच और आधुनिक सुविधाओं के मेल से पर्यटन की नई पहचान बनाई गई है। रोपवे परियोजनाओं, धामों के पुनर्विकास और एडवेंचर गतिविधियों के विस्तार ने उत्तराखण्ड को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रमुख डेस्टिनेशन बना दिया है।
चार साल में उत्तराखण्ड बना विकास और सम्मान का मॉडल
चार वर्षों में सीएम धामी की अगुवाई में उत्तराखण्ड सरकार ने पर्यटन और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में ‘आस्था के साथ आधुनिकता’ का मॉडल प्रस्तुत किया है। रोपवे, धार्मिक सर्किट, धामों का कायाकल्प, एडवेंचर गतिविधियों का विस्तार और समाज सेवा की पहल ने राज्य को मजबूत और सशक्त बनाया है। राज्य सरकार के लक्ष्य ‘सेवा, सम्मान व सुशासन’ को हर निर्णय की आधारशिला बनाना है। ये कदम न केवल विकास को गति देते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए जीवन स्तर में सुधार और अवसर भी प्रदान कर रहे हैं।
तीर्थ यात्राएं होंगी आसान और सुरक्षित
उत्तराखण्ड में तीर्थयात्रियों के अनुभव को आसान और आरामदायक बनाने के लिए कई बड़े रोपवे प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। केदारनाथ धाम के लिए सोनप्रयाग से 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे 4,081 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। इसी तरह, हेमकुण्ड साहिब के लिए गोविंदघाट से 12.4 किलोमीटर का रोपवे 2,730 करोड़ रुपये में विकसित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को पैदल यात्रा की कठिनाई से निजात मिलेगी और यात्रा का समय भी आधा हो जाएगा। रोपवे परियोजनाओं का उद्देश्य केवल यात्रा को आसान बनाना ही नहीं है, बल्कि तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को भी सुनिश्चित करना है।
शीतकालीन पर्यटन और धार्मिक सर्किट का नया अनुभव
उत्तराखण्ड ने पहली बार शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल की शोभा देखने का अवसर मिला, जिससे इस पहल को राष्ट्रीय स्तर का समर्थन मिला। कुमाऊं क्षेत्र में मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत 48 मंदिरों और गुरुद्वारों को एक धार्मिक सर्किट में विकसित किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली है और श्रद्धालुओं को एक व्यवस्थित और यादगार यात्रा का अनुभव मिल रहा है।

धामों के कायाकल्प से आध्यात्मिक और आधुनिक सुविधाओं का संगम
केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। बदरीनाथ धाम को स्मार्ट आध्यात्मिक पहाड़ी कस्बे के रूप में विकसित करने के लिए 255 करोड़ रुपये की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। हरिपुर कालसी में यमुना तीर्थ स्थल का निर्माण और महासू मंदिर, हनोल के मास्टर प्लान को मंजूरी देकर नए धार्मिक स्थलों को भी तैयार किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाना है, बल्कि राज्य की धार्मिक धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित करना भी है।
एडवेंचर और स्पोर्ट्स टूरिज्म में नया मुकाम
उत्तराखण्ड को एडवेंचर टूरिज्म का हब बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं। राज्य में 83 प्रमुख हिमालयी चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोला गया है, जिससे देश-विदेश के पर्वतारोहियों की रुचि बढ़ी है। आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का आयोजन किया गया, जिसमें 22 राज्यों से 700 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन एडवेंचर टूरिज्म को नई पहचान दे रहा है। राज्य ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग और स्टार गैजिंग के प्रमुख आकर्षण बन चुका है। प्रधानमंत्री की अपील “वेड इन उत्तराखंड” के बाद, राज्य अब वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी पहचान बनाने लगा है।
आंदोलनकारियों व सैनिकों के सम्मान में ऐतिहासिक फैसले
उत्तराखण्ड सरकार ने चार साल के कार्यकाल में आंदोलनकारियों, सैनिकों और आमजन के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। उनके आश्रितों की पेंशन 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। वहीं, जेल गए या घायल हुए आंदोलनकारियों की पेंशन 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रतिमाह की गई है।
शहीद सैनिकों के सम्मान में बढ़ी अनुग्रह राशि
शहीद सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई। परमवीर चक्र विजेताओं के लिए यह राशि 50 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई। अग्निवीर योजना के अंतर्गत सेवा देने वाले युवाओं को भी सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मिलने का निर्णय लिया गया।
सेवा का संकल्प: जनता के द्वार तक पहुंची सरकार
धामी सरकार की ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ पहल ने जनता तक सरकारी सेवाओं को पहुंचाने में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेशभर में 686 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 5.37 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इन शिविरों के माध्यम से 2.96 लाख से अधिक नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। प्राप्त 51,317 शिकायतों में से 33,990 का मौके पर ही समाधान किया गया। डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए अपुणि सरकार पोर्टल के माध्यम से लगभग 950 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है, जिससे आम नागरिक घर बैठे सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं।
समाज के हर वर्ग का रखा ध्यान
वृद्धजनों के लिए वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दी गई है, जिससे अब बुजुर्ग दंपत्ति दोनों इसका लाभ ले सकते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों और लेखकों की मासिक पेंशन 3,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दी गई है। इस तरह के निर्णय लेकर सरकार ने समाज के हर वर्ग, आंदोलनकारी, सैनिक, बुजुर्ग, महिला और आम नागरिक को ध्यान में रखते हुए समावेशी विकास की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।






