लखनऊ, 22 मार्च 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में रविवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अहम बैठक आयोजित हुई। इसमें बसपा प्रमुख एवं पूर्व सीएम मायावती ने मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ इकाइयों के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ संगठन की स्थिति, जनाधार विस्तार और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर समीक्षा की। बैठक में मुख्य सेक्टर प्रभारी राजाराम और अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा पेश फीडबैक के आधार पर इन राज्यों में संगठनात्मक प्रगति को संतोषजनक लेकिन और मजबूत करने योग्य बताया गया।
बैठक के दौरान मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर इन राज्यों में भी पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ अम्बेडकरवादी कारवां को आगे बढ़ाना होगा जिससे बहुजन समाज ‘शासक वर्ग’ बन सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जातिवादी शोषण और गरीब विरोधी नीतियों से मुक्ति का एकमात्र रास्ता सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथ में लेना है।
उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकारों का जिक्र करते हुए कहा कि इन अधिकारों को जमीन पर लागू कराने के लिए राजनीतिक शक्ति बेहद जरूरी है। साथ ही, बसपा संस्थापक कांशीराम के संघर्षों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके अधूरे मिशन को पूरा करने की जिम्मेदारी अब पार्टी कार्यकर्ताओं पर है।
मायावती ने बैठक में बढ़ती जातिवादी आपराधिक घटनाओं पर भी चिंता जताई और कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि चुनाव से पहले मिलने वाले प्रलोभनों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रलोभन अक्सर बहुजन समाज के हितों को कमजोर करते हैं और आने वाले समय में नुकसानदायक साबित होते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से दलित, आदिवासी, पिछड़े और मुस्लिम समाज से अपील की कि वे आपसी भाईचारे और एकता के आधार पर संगठित हों। वोट हमारा, राज तुम्हारा अब नहीं चलेगा का नारा तभी साकार होगा जब बहुजन समाज पूरी मजबूती से एकजुट होगा।
बसपा प्रमुख ने अपने संबोधन में पार्टी के शासनकाल की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूपी में चार बार बसपा सरकार बनने पर सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीति के तहत कानून का राज स्थापित किया गया, जो अन्य दलों से अलग पहचान बनाता है। उन्होंने दावा किया कि जब-जब बसपा मजबूत हुई है, तब-तब समाज के कमजोर वर्गों को उनके अधिकार सुनिश्चित हुए हैं।
मायावती ने आरोप लगाया कि वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियां गरीब, किसान और बहुजन समाज के खिलाफ हैं। पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज को अब अपने अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करना होगा और चुनावी सफलता के जरिए सत्ता हासिल करनी होगी। उन्होंने 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती और बसपा के स्थापना दिवस को मिशनरी भावना के साथ मनाने की अपील की जिससे सामाजिक परिवर्तन के लक्ष्य को मजबूती मिल सके।






