लखनऊ, 23 मार्च 2026:
समाजवादी विचारक डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर सोमवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित लोहिया पार्क पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने लोहिया की प्रतिमा पर पुष्पांजलि दी और उनके विचारों को आज के दौर में भी प्रासंगिक बताया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने गोरखपुर में भाजपा नेता राजकुमार चौहान की हत्या का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अब तक स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में क्या कार्रवाई हुई और किसे बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि केस से किसका नाम हटाया गया और असली दोषी कौन है? यह सरकार को पारदर्शिता के साथ बताना चाहिए।
अखिलेश ने राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि बदायूं, मथुरा और बनारस में छात्रों की हत्या की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि अपराधी बेखौफ हो चुके हैं। उन्होंने एक राज्यसभा सांसद के ‘नंगा कर दूंगा’ जैसे बयान पर भी सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया।

पश्चिम बंगाल की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा चाहे चुनाव आयोग के माध्यम से कितनी भी बाधाएं खड़ी करे लेकिन वहां की जनता ममता बनर्जी की सरकार को ही दोबारा चुनेगी। उन्होंने कहा कि ममता सरकार ने हर स्तर पर काम किया और जनता उनके साथ खड़ी है।
फिल्मों को लेकर भी अखिलेश यादव ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आजकल कुछ फिल्मों के जरिए प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश हो रही है जबकि सिनेमा का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए न कि किसी विचारधारा को थोपना।
प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश ने कहा कि लोहिया पार्क से कौन फूल लेकर जाता है, यह बताने की जरूरत नहीं है। वहीं निषाद के भावुक होने पर उन्होंने कहा कि विदाई के समय रोना स्वाभाविक है।
अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना की मांग दोहराते हुए कहा कि आबादी के हिसाब से सभी को हक और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने महंगाई और किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि आलू उत्पादक किसानों को भारी नुकसान हुआ है। सरकार बताए कि उसने खरीद के लिए कितना इंतजाम किया। उन्होंने कहा कि लोहिया का समानता और न्याय का सिद्धांत आज भी उतना ही जरूरी है.और समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।






