लखनऊ, 23 मार्च 2026:
यूपी सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए गोरखपुर को ‘सोलर सिटी’ बनाने की दिशा में निर्णायक पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में हुई यूपी कैबिनेट बैठक में 37 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें चिलुआताल में 20 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित करने का महत्वपूर्ण निर्णय शामिल है।
यह परियोजना सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा लगभग 140 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की जाएगी। खास बात यह है कि यह सोलर प्लांट पानी की सतह पर तैरते हुए विशेष फाइबर स्ट्रक्चर पर लगाया जाएगा। यह पानी में खराब नहीं होगा और लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा।

सरकार के अनुसार इस फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट से प्रतिवर्ष न्यूनतम 33.29 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा जबकि लक्ष्य 38.54 मिलियन यूनिट तक पहुंचने का है। यह ऊर्जा ग्रिड में फीड होकर गोरखपुर की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में सहायक बनेगी।
गौरतलब है कि प्रदेश में इससे पहले औरैया में एनटीपीसी द्वारा 20 मेगावाट और खुर्जा में टीएचडीसी द्वारा 11 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। अब चिलुआताल परियोजना इस दिशा में एक और बड़ा विस्तार मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी का जोर प्रदेश में क्लीन और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने पर है। इसी सोच के तहत उन्होंने चिलुआताल को सौर ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने के निर्देश दिए थे। इस पहल से न सिर्फ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
परियोजना के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया 19 दिसंबर 2025 से शुरू हुई थी। इसकी अंतिम तिथि 23 मार्च 2026 तय की गई है। 24 मार्च को टेंडर खोले जाएंगे।
प्लांट की कंट्रोल यूनिट हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) परिसर के पास स्थापित की जाएगी।
यह परियोजना गोरखपुर में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगी। चिलुआताल की लहरों पर तैरता यह सोलर प्लांट गोरखपुर को ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाला साबित होगा।






