देहरादून, 23 मार्च 2026:
उत्तराखंड में रसोई गैस (एलपीजी) की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय से सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अहम समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति मांग के अनुरूप समय पर सुनिश्चित की जाए जिससे किसी भी स्तर पर उपभोक्ताओं को असुविधा न हो।
मुख्य सचिव ने जनपदवार गैस आपूर्ति की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य आवश्यक सेवाओं को गैस की निर्बाध आपूर्ति मिलना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने डीएम को निर्देशित किया कि वे एलपीजी स्टेट कोऑर्डिनेटर के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें और जमीनी स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करें।
बैठक में तेजी से शहरीकरण के कारण उभर रहे नए इलाकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में अपग्रेड हुए इलाकों को तेल कंपनियों के सिस्टम में जल्द से जल्द शामिल किया जाए जिससे वहां गैस आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
इसके साथ ही उन्होंने पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) कनेक्शन को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि व्यावसायिक संस्थानों को पीएनजी अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। इससे एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और गैस आपूर्ति व्यवस्था अधिक संतुलित बनेगी। मुख्य सचिव ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में पिरुल (चीड़ की पत्तियों) से बने ब्रिकेट्स के उपयोग को भी बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने बताया कि इससे एलपीजी की खपत घटेगी और जंगलों में पिरुल के निस्तारण की समस्या का समाधान भी होगा। बैठक में प्रमुख सचिव एल फैनाई, सचिव विनोद कुमार सुमन, आनन्द स्वरूप और डीजी यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।






