न्यूज डेस्क, 24 मार्च 2026:
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उससे उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट ने भारत के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इस संवेदनशील स्थिति पर मंगलवार को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान देते हुए देश की रणनीति और तैयारियों का खाका पेश किया।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष का सीधा असर भारत के व्यापारिक मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। विशेष रूप से कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर की आपूर्ति के प्रमुख मार्ग हॉर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती अस्थिरता के कारण जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल जहाजों पर हमले और इस समुद्री मार्ग में बाधा पूरी तरह अस्वीकार्य है।
मोदी ने बताया कि भारत इस संकट से निपटने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। ईरान, अमेरिका और इजराइल सहित पश्चिम एशिया के कई देशों से लगातार संवाद बनाए रखा गया है जिससे ऊर्जा आपूर्ति सुचारु बनी रहे। हाल के दिनों में कई देशों से कच्चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं। यह सरकार के प्रयासों का परिणाम है।
खाड़ी देशों में रह रहे एक करोड़ से अधिक भारतीयों की सुरक्षा को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। पीएम ने जानकारी दी कि युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 3.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। इनमें ईरान से लौटे 1000 से अधिक भारतीय भी शामिल हैं जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र हैं। हालांकि कुछ हमलों में भारतीयों के घायल होने की खबर भी है जिनका इलाज कराया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश में क्रूड ऑयल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। सरकार एलपीजी के साथ-साथ पीएनजी कनेक्शन को भी तेजी से बढ़ा रही है। घरेलू उत्पादन में वृद्धि पर जोर दिया जा रहा है।
इस संकट के बीच आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 70 हजार करोड़ रुपये की स्वदेशी जहाज निर्माण परियोजना शुरू की है। इसका उद्देश्य आयात के लिए विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम करना और भारत की समुद्री क्षमता को मजबूत बनाना है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि हाल ही में सात नए एंपावर्ड ग्रुप का गठन किया गया है जो सप्लाई चेन, महंगाई, पेट्रोल-गैस और खाद की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर त्वरित निर्णय लेंगे।
उन्होंने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि बोआई के मौसम में खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी। मोदी ने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है और सभी पक्षों से संवाद के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है जिससे वैश्विक स्थिरता और मानवता की रक्षा हो सके।
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