लखनऊ, 26 मार्च 2026:
उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती अब महिलाओं के लिए कमाई का मजबूत जरिया बनती जा रही है। बीते कुछ साल में 57 हजार से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं गन्ना बीज उत्पादन से जुड़कर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। इससे गांवों में आमदनी बढ़ी है और परिवार की आर्थिक हालत में सुधार हुआ है।
प्रदेश में 2020-21 से शुरू हुए उन्नत गन्ना बीज वितरण कार्यक्रम का असर अब साफ दिख रहा है। 37 जिलों में 3,163 महिला स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जिनसे जुड़कर 57,322 महिलाओं को काम मिला। इस पहल से अब तक करीब साढ़े चार लाख कार्य दिवस का रोजगार तैयार हुआ है।
महिलाओं को मिली प्राथमिकता, बढ़ा भरोसा
गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि गन्ना उत्पादन में पहली बार महिला किसानों को पर्ची जारी करने में प्राथमिकता दी गई है। इसका सीधा फायदा प्रदेश की करीब डेढ़ लाख महिला गन्ना किसानों को मिल रहा है। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे खेती में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
दलित और आदिवासी महिलाओं की भागीदारी
इस योजना में सामाजिक संतुलन पर भी ध्यान दिया गया है। इसमें 10,270 अनुसूचित जाति और 130 अनुसूचित जनजाति की महिलाएं शामिल हैं, जो अब खुद कमाकर परिवार को सहारा दे रही हैं। महिला समूहों ने अब तक 60.73 करोड़ गन्ना बीज तैयार किया है। इसके बदले उन्हें 77.83 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद मिली है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए कमाई का नया रास्ता खुला है।
गांव की अर्थव्यवस्था को मिला सहारा, आगे और सुविधाएं देने की तैयारी
गन्ना खेती में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से गांवों में कामकाज बढ़ा है। ट्रांसपोर्ट, मजदूरी और छोटे कारोबार इससे जुड़े हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि महिलाओं को और मजबूत करने के लिए गन्ना विभाग ने ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ समझौता किया है। इसके तहत समितियों में प्रेरणा कैंटीन चलाई जाएंगी और महिलाओं को लोन व दूसरी सुविधाएं भी दी जाएंगी, ताकि उनकी आमदनी और बढ़ सके।






